कैथल: पराली जलाने पर निगरानी के लिए जिले में तैनात किए 629 नोडल अधिकारी

कैथल में धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को बहुत मजबूत कर दिया है। जिले में फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी के लिए कुल 629 नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी अधिकारी संबंधित एचसीएस अधिकारियों के निर्देशन में गांवों में लगातार जाकर स्थिति पर पूरी नजर रख रहे हैं।
लघु सचिवालय में डीसी अपराजिता की समीक्षा बैठक
वीरवार को लघु सचिवालय में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में डीसी अपराजिता ने अधिकारियों से अब तक की गई सभी तैयारियों की पूरी जानकारी ली है। उन्होंने यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि पराली जलाने की किसी भी घटना को रोकने के लिए फील्ड स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।
कैलरम गांव रेड जोन में और 16 गांव येलो जोन में शामिल
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले का कैलरम गांव रेड जोन की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके अलावा अन्य 16 गांवों को येलो जोन में रखा गया है। इन सभी संवेदनशील गांवों में विशेष रूप से निगरानी की जा रही है। किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराई जा रही मशीनरी और अन्य सुविधाओं की पूरी जानकारी भी दी जा रही है।
पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध कराने और सख्त कार्रवाई के निर्देश
प्रशासन ने जिले में इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध होने का बड़ा दावा किया है। डीसी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि किसानों को मशीनरी उपलब्ध करवाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आनी चाहिए। खेतों में पराली जलाने की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और सरकार की प्रोत्साहन राशि की जानकारी भी दी जाए।
धारा 163 लागू और मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग
प्रशासन की तरफ से जिले में धारा 163 पहले से ही लागू की गई है। पराली जलाते हुए पकड़े जाने पर भारी जुर्माने के साथ राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी। पराली से तैयार बेल्स के सुरक्षित भंडारण के लिए स्टोरेज यार्ड की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बैठक से पहले मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ समीक्षा की थी। इस दौरान डीडीए रविंद्र कुमार और डीआईपीआरओ नसीब सैनी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।