पत्रकार प्रवेश गौतम पर FIR के खिलाफ DGP से शिकायत: निष्पक्ष जांच की मांग

इंदौर /01 अक्टूबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
भोपाल में समाचार प्रकाशित करने के आधार पर पत्रकार प्रवेश गौतम के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच में दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। रॉयल प्रेस क्लब ने मध्यप्रदेश के डीजीपी से शिकायत कर एफआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि बिना ठोस सबूतों और बिना प्रारंभिक जांच के यह आपराधिक मामला दर्ज किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भोपाल में एक समाचार प्रकाशन के बाद पत्रकार प्रवेश गौतम के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के विरोध में पत्रकार संगठन एकजुट होने लगे हैं और पुलिस प्रशासन की जल्दबाजी में की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
रॉयल प्रेस क्लब ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। संगठन का आरोप है कि इंदौर पुलिस ने बिना किसी प्राथमिक विवेचना और बिना ठोस प्रमाणों के पत्रकार के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है, जो सीधे तौर पर निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की कोशिश लगती है।
रॉयल प्रेस क्लब के अध्यक्ष पंकज भदौरिया द्वारा सौंपी गई इस शिकायत में एफआईआर के समय और उसमें दिए गए तथ्यों के विरोधाभास को प्रमुखता से उठाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस व्यक्ति के हवाले से पैसों की मांग का दावा किया जा रहा है, उसके पक्ष में कोई भी वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
शिकायत पत्र में दर्ज मुख्य बिंदुओं के अनुसार, कथित रूप से पैसों की मांग की तारीख 16 सितंबर 2025 बताई गई है, जबकि इसके लिए लगभग एक वर्ष बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। इतनी लंबी देरी खुद पूरी कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाती है। इसके अलावा, जिस खबर को रोकने के नाम पर वसूली का आरोप लगाया गया है, वह खबर 20 दिसंबर 2025 को ही सार्वजनिक रूप से प्रकाशित हो चुकी थी।

पुलिस एफआईआर में दस्तावेजों की चोरी का भी आरोप लगाया गया है, लेकिन शिकायतकर्ता संगठन का कहना है कि संबंधित दस्तावेज शिकायत दर्ज कराने वाली कंपनी या व्यक्ति से जुड़े ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, चोरी के आरोपों में तारीख और समय तक का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जो कानूनी प्रक्रिया के अभाव को दर्शाता है।
संगठन का यह भी कहना है कि अगर कथित घटना भोपाल की बताई जा रही है, तो बिना क्षेत्राधिकार और बिना प्राथमिक जांच के इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा मामला दर्ज किया जाना किसी दबाव या अन्य इरादों का संकेत देता है। एफआईआर में यह भी स्पष्ट नहीं है कि किस खबर को आधार बनाकर क्या शिकायत की गई है, जिससे पत्रकार को बदनाम करने का प्रयास साफ़ नजर आता है।
रॉयल प्रेस क्लब ने डीजीपी से मांग की है कि इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज इस एफआईआर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से तथ्यात्मक जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्लब ने अपनी शिकायत के अंत में यह मांग भी रखी है कि यदि निष्पक्ष जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप झूठे या दुर्भावनापूर्ण पाए जाते हैं, तो गलत जानकारी देकर पुलिस को गुमराह करने वाले शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।