जींद में वामपंथी पार्टियों का जोरदार प्रदर्शन, एसआईआर रद्द करने और वोट अधिकार बहाल करने की उठी मांग

जींद में शनिवार को वामपंथी पार्टियों की तरफ से अंबेडकर चौक पर एक बड़ा प्रदर्शन किया गया और धरना दिया गया। यह धरना विशेष गहन पुनरीक्षण यानि एसआईआर को पूरी तरह से रद्द करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान मतदाता सूचियों से कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के अधिकार फिर से बहाल करने की मांग उठाई गई। इसके अलावा चुनाव आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह से सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
धरने की अध्यक्षता और संचालन
इस महत्वपूर्ण धरने की अध्यक्षता सीपीआईएम नेता प्रकाश चंद्र ने की। जबकि इस पूरे कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव कपूर सिंह द्वारा किया गया।
मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद
धरने को संबोधित करते हुए वामपंथी नेता रमेश चंद्र व विनोद ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की मनमानी या अपारदर्शी प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया पर बड़े सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। जिन योग्य नागरिकों के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके मताधिकार तुरंत बहाल किए जाएं।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा
नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और स्वतंत्रता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति की संस्था नहीं है। यह संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। इसलिए आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, सामूहिकता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मांग
एसआईआर से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। नेताओं ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
लोकतांत्रिक ताकतों से आगे आने की अपील
नेताओं ने कहा कि चुनाव में जनता का वोट ही उसकी सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत है। इसलिए वोट और मतदाता सूची की निष्पक्षता की रक्षा करना बेहद जरूरी है। सभी लोकतांत्रिक, जनवादी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को इसके लिए आगे आना चाहिए। अंत में उन्होंने दोबारा मांग की कि एसआईआर को रद्द किया जाए और गलत तरीके से हटाए गए सभी योग्य नागरिकों के मताधिकार बहाल किए जाएं।