जींद की अदालत ने हत्या का प्रयास करने के दोषी को सुनाई पांच वर्ष की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा

जींद जिले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने हत्या का प्रयास करने के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हत्या का प्रयास करने के दोषी को पांच वर्ष का कठोर कारावास व 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनाया गया है।
क्या था पूरा मामला और कैसे शुरू हुई रंजिश
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, गांव सुरबुरा निवासी सतीश ने 27 अप्रैल 2020 को पुलिस को एक शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि उसके भाई सुलतान ने अपनी क्रूजर गाड़ी को अपने मकान के बाहर खड़ा किया हुआ था। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उस गाड़ी में आग लगा दी थी। इस घटना के बाद सुलतान ने गांव के ही रहने वाले राजेश पर अपनी गाड़ी में आग लगाने का संदेह जताया था।
पंचायत के बाद भी नहीं थमी रंजिश
गाड़ी में आग लगाने के संदेह को लेकर दोनों पक्षों के बीच गांव में एक पंचायत भी बुलाई गई थी। पंचायत के दौरान राजेश ने गाड़ी में आग लगाने की घटना से साफ तौर पर इनकार कर दिया था। उस समय तो दोनों पक्षों के बीच का मामला किसी तरह शांत हो गया था। लेकिन पुरानी रंजिश के चलते सुलतान पक्ष के लोगों ने मौका पाकर राजेश पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में राजेश गंभीर रूप से घायल हो गया था।
पुलिस कार्रवाई और अस्पताल में इलाज
परिजनों द्वारा घायल राजेश को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था। वहां के चिकित्सकों ने राजेश की हालत को बेहद गंभीर देखते हुए उसे पीजीआई रोहतक के लिए रेफर कर दिया था। उचाना थाना पुलिस ने राजेश की शिकायत के आधार पर सुलतान के खिलाफ जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी सुलतान को तुरंत गिरफ्तार भी कर लिया था और तभी से यह मामला अदालत में विचाराधीन चल रहा था।
अदालत का फैसला और सजा
थाना उचाना पुलिस द्वारा इस मामले में गहनता से जांच की गई और सभी आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए गए। पुलिस ने पूरी जांच के बाद सुलतान के खिलाफ माननीय न्यायालय में चालान पेश किया था। मामले की प्रभावी पैरवी और अदालत में प्रस्तुत किए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला आया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने सुलतान को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को पांच वर्ष का कठोर कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के अनुसार यदि दोषी द्वारा जुर्माना राशि अदा नहीं की जाती है, तो उसे इसके एवज में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।