घनौर मंडी में धान खरीद के इंतजामों का जायजा, सरकार से समय से पहले खरीद शुरू करने की मांग

घनौर मंडी में धान खरीद के इंतजामों का जायजा, सरकार से समय से पहले खरीद शुरू करने की मांग

युवा अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और घनौर हलका इंचार्ज सरबजीत सिंह झिन्जर ने सोमवार को घनौर की ग्रेन मार्केट यानी दाना मंडी का दौरा किया। उन्होंने वहां धान की खरीद के इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार से मांग की कि बिन किसी देरी के फसल की उठान का काम तुरंत शुरू किया जाए।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरबजीत सिंह झिन्जर ने बताया कि किसानों ने पहले ही अपनी फसल मंडियों में लाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों से फसल मंडियों में आ रही है। इसके बावजूद सरकार ने खरीद शुरू करने के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।

झिन्जर ने बताया कि इलाके में हुई बारिश के कारण किसानों को अपनी फसल को तिरपाल से ढकने और मौसम से बचाने के लिए अन्य उपाय करने पड़ रहे हैं।

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उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार पराली जलाने की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए ड्रोन और अन्य तकनीक का इस्तेमाल करती है, लेकिन बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे करने में सरकार विफल रही है। उन्होंने सवाल किया कि किसानों को ऐसे मौसम से बचाने के लिए इसी तरह के उपाय क्यों नहीं किए जा रहे हैं?

अकाली नेता ने कहा कि बारिश के कारण धान में नमी की मात्रा तीन से चार डिग्री तक बढ़ गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों को नमी के मानदंडों में कम से कम तीन डिग्री की छूट दे, ताकि किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई की जा सके।

झिन्जर ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि जिन मंडियों में फसल आधिकारिक तारीख से दो दिन पहले आ चुकी है, वहां खरीद तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उठाने से सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि किसानों को बहुत जरूरी राहत मिल जाएगी।

उन्होंने आगे मांग की कि मंडियों में बारदाना यानी गनी बैग्स के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि किसानों को बारदाने के लिए भी संघर्ष न करना पड़े।

आप सरकार से जल्द से जल्द खरीद शुरू करने का आग्रह करते हुए झिन्जर ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मंडियों में सभी इंतजाम समय पर पूरे हों। इसमें पीने के पानी और निर्बाध बिजली से लेकर सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी तक सब शामिल होना चाहिए, ताकि किसानों को खरीद की प्रक्रिया सुचारू रूप से मिल सके।

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