जींद में आशा और मिड-डे मील वर्करों का जोरदार प्रदर्शन, सांसद प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन

- जींद में स्कीम वर्करों ने रविवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
- सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया।
- वर्करों ने कम मानदेय और बढ़ते काम के बोझ का विरोध किया।
जींद में 04 अक्टूबर को स्कीम वर्करों ने रविवार को अपनी मांगों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया है। अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए इन वर्करों ने सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी के प्रतिनिधि वजीर गांगोली को एक ज्ञापन सौंपा है।
यह प्रदर्शन मिड डे मिल वर्कर्स एवं आशा वर्कर्स की तरफ से किया गया है। यह सभी वर्कर लघु सचिवालय के बाहर एकत्रित हुए थे। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नीलम तथा मिड डे मिल वर्कर्स यूनियन की जिला उपप्रधान पिंकी ने संयुक्त रूप से की।
वर्करों ने उठाया मानदेय और काम के बोझ का मुद्दा
वर्करों को संबोधित करते हुए आशा वर्कर यूनियन की जिला उपप्रधान मुकेश ने बात रखी। इसके साथ ही मिड डे मिल वर्कर्स यूनियन जिला सहसचिव कविता ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा और मिड डे मिल सहित विभिन्न स्कीमों में लाखों महिलाएं काम कर रही हैं।
यह सभी महिला वर्कर्स सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर लागू करने का काम कर रही हैं। इसके बावजूद इन महिलाओं को आज तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। बेहद कम मानदेय पर इनसे काम लिया जा रहा है। इसके बाद भी इनसे काम का लगातार बोझ बढ़ाया जा रहा है।
सरकार के दावों पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ विकास और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन दूसरी तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश की सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी संस्थाओं को निजी एवं कॉरपोरेट हितों کے हवाले किया जा रहा है। इन नीतियों का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान और कर्मचारी वर्ग पर पड़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा और श्रम अधिकारों को मजबूत करने के बजाय सरकारी संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने का इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।
प्रमुख मांगें और भविष्य की चेतावनी
उन्होंने मांग की कि 45वें श्रम सम्मेलन के निर्णय के अनुसार सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स को शामिल किया जाए। इसमें आशा वर्कर्स, मिड डे मिल वर्कर्स, क्रेच वर्कर्स एवं हेल्पर्स सहित सभी स्कीम वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
सभी स्कीम वर्कर्स को 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए और 12 महीने का पूरा वेतन दिया जाए। इसके अलावा सभी स्कीम वर्कर्स को ग्रेच्युटी एवं रिटायरमेंट लाभ दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही 21 हजार रुपये मासिक पेंशन भी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को तुरंत रद्द किए जाने की मांग की गई है। किसी भी मिड डे मिल वर्कर की छंटनी न किए जाने की बात कही गई है। छंटनी किए गए वर्करों को तुरंत प्रभाव से वापस नौकरी पर बहाल किया जाए।
एफआरएस को अनिवार्य करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। सभी लाभार्थियों को आईसीडीएस की सभी सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध करवाई जाएं।