जाखल की नई बस्ती के पांच साल से अटके मामले में हकीकत देखने पहुंची प्रशासनिक टीम

जाखल की नई बस्ती के पांच साल से अटके मामले में हकीकत देखने पहुंची प्रशासनिक टीम

नई बस्ती की हकीकत देखने पहुंची प्रशासनिक टीम

जाखल/16 सितम्बर 2026/योगेश खनेजा/अटल हिन्द ब्यूरो

जाखल की नई बस्ती का कुछ हिस्सा पिछले करीब पांच वर्षों से प्रशासनिक व्यवस्था में फंसा हुआ है। यहाँ रहने वाले करीब 672 मतदाताओं और लगभग 2000 की आबादी को लेकर स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर बुधवार को प्रशासनिक टीम ने मौके का निरीक्षण किया।

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प्रशासनिक टीम में नायब तहसीलदार रसविंदर सिंह जाखल, बीडीपीओ बलजीत सिंह जाखल और नगरपालिका सचिव प्रवीन कुमार शामिल रहे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र की गलियों, रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। इस निरीक्षण का उद्देश्य क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

बस्तीवासी पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार मांग उठा रहे हैं कि नई बस्ती को अलग ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए। या फिर इसे जाखल ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए। इस मांग को लेकर बीडीपीओ जाखल, उपायुक्त फतेहाबाद और मुख्यमंत्री को कई बार मांग पत्र सौंपे जा चुके हैं।

जाखल ग्राम पंचायत की ग्राम सभा की बैठक में 672 मतदाताओं को जाखल ग्राम पंचायत में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। सरपंच अर्जुन सिंह ने बताया कि प्रस्ताव की प्रति उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने मांग की है कि क्षेत्र को जल्द ग्राम पंचायत में शामिल कर विकास कार्य शुरू करवाए जाएं।

कुछ दिन पहले नई बस्ती के लोगों ने पूर्व मंत्री देवेंद्र सिंह बबली से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी थी। बस्तीवासियों के अनुसार पूर्व मंत्री ने समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया था। साथ ही डीसी फतेहाबाद से इस मामले में कार्रवाई करवाने की बात कही थी।

बस्तीवासियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे नगरपालिका में शामिल नहीं होना चाहते हैं। उनकी पहली मांग जाखल ग्राम पंचायत में शामिल किए जाने की है। यदि यह संभव न हो तो अलग ग्राम पंचायत का गठन किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि नजरअंदाज करने पर वे प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

अपनी मांग के समर्थन में बस्ती वासियों ने क्षेत्र के किसानों से मुलाकात कर सहयोग मांगा है। किसानों ने समर्थन देते हुए कहा है कि प्रशासन ने समाधान नहीं किया तो वे भी साथ खड़े होंगे। जरूरत पड़ने पर किसान धरना-प्रदर्शन में भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेंगे।

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