अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की तैयारियां शुरू, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के साथ किया मंथन

कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 के आयोजन के लिए तैयार किया जा रहा है। गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कुरुक्षेत्र में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। यह बैठक गुरुवार को गीता ज्ञान संस्थानम, कुरुक्षेत्र में आयोजित की गई थी। इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 के आयोजन को लेकर चर्चा की गई। बैठक में कुरुक्षेत्र की धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री के समक्ष रखे गए सुझाव
इस बैठक के दौरान विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने महोत्सव के आयोजन को लेकर अपने सुझाव रखे। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं से मिलकर काम करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महोत्सव को भव्य बनाया जाना चाहिए। महोत्सव गरिमापूर्ण और जनभागीदारी से युक्त होना चाहिए।
गीता एक जीवन दर्शन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है। गीता जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के गीता संबंधी विचारों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांधी जी क्या सोचते थे। गांधी जी गीता को जीवन की कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन मानते थे। गीता संघर्षों में सांत्वना देने वाला ग्रंथ है, ऐसा गांधी जी का मानना था।
लोकमान्य तिलक और श्री अरविंद के विचार
मुख्यमंत्री ने अन्य महापुरुषों के विचारों का भी जिक्र किया। लोकमान्य तिलक ने गीता के कर्मयोग पर विशेष बल दिया था। तिलक जी ने कर्तव्य के प्रति निष्ठा का संदेश दिया था। उन्होंने हमेशा कर्म करते रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने श्री अरविंद के विचारों का भी उल्लेख किया। श्री अरविंद के अनुसार गीता का संदेश जीवन से विमुख होना नहीं है। गीता कर्म और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से जीवन को बेहतर दिशा देती है।
जन-जन तक पहुंचेगा गीता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के माध्यम से गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए। महोत्सव की प्रत्येक गतिविधि में गीता का संदेश केंद्र में रहना चाहिए। यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति कुरुक्षेत्र की संस्कृति को समझेगा। वह व्यक्ति गीता के संदेश को अपने साथ लेकर अपने घर लौटेगा।
स्वच्छ और पवित्र कुरुक्षेत्र का संकल्प
कुरुक्षेत्र की साफ-सफाई को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। कुरुक्षेत्र का वातावरण गीता की भूमि की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। वातावरण स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित रहना चाहिए। इसके लिए सभी लोगों को मिलकर कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने एक विशेष संकल्प का आह्वान किया। उन्होंने 'स्वच्छ कुरुक्षेत्र, पवित्र कुरुक्षेत्र' को सामूहिक संकल्प बनाने के लिए कहा।
महाभारत कालीन थीम पर विकसित होंगे चौक
शहर के विकास को लेकर भी बड़ी घोषणा की गई है। कुरुक्षेत्र के सभी प्रमुख चौकों को महाभारत कालीन थीम पर विकसित किया जाएगा। इससे शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐतिहासिक पहचान दिखेगी। शहर की सांस्कृतिक पहचान को आसानी से प्रदर्शित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा पूरा प्रयास जारी है। पूरी कुरुक्षेत्र नगरी गीता और भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के भाव को प्रतिबिंबित करे।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज का संदेश
इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएं सद्भावना के साथ जुड़ें। सभी संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से पूरी तरह जुड़ें। इससे हमारे तीर्थ कुरुक्षेत्र का गौरव और बढ़ेगा। हम सभी का गौरव इससे ऊंचा होगा। स्वामी जी ने स्वच्छता अभियान को लेकर भी बात कही। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ सभी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। सभी संस्थाओं को स्वच्छता अभियान में अपना योगदान देना चाहिए।