उत्तर प्रदेश की आईजीआरएस व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी, सत्यापित पहचान और एआई आधारित शिकायत छंटाई का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश की जनशिकायत निवारण व्यवस्था आईजीआरएस में आने वाले समय में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना दिखाई दे रही है। आईजीआरएस के दुरुपयोग, एक ही विषय पर बार बार शिकायतें, फर्जी पहचान, कथित ब्लैकमेल और शिकायतों के माध्यम से अवैध लाभ प्राप्त करने जैसी आशंकाओं को लेकर प्रशासनिक, डिजिटल, नीतिगत और विधायी सुधारों का व्यापक प्रस्ताव शासन के समक्ष पहुंचा है। यह प्रस्ताव सामाजिक, आरटीआई और आईजीआरएस कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा की ओर से रखा गया है। उपलब्ध सरकारी अभिलेख में इस प्रकरण को नीति विषयक बताते हुए कहा गया है कि इसमें समय लगने की संभावना है।
शिकायत व्यवस्था में डिजिटल पहचान का प्रस्ताव
प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में प्रत्येक आईजीआरएस शिकायत को सत्यापित डिजिटल पहचान से जोड़ने की बात कही गई है। इसके साथ शिकायतकर्ताओं के लिए स्थायी और विशिष्ट आईजीआरएस पहचान विकसित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि शिकायतकर्ता की पहचान को विधिसम्मत डिजिटल पहचान प्रणाली के माध्यम से सत्यापित किया जा सके। उर्वशी शर्मा ने शासन के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा है कि ऐसी व्यवस्था से शिकायत प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है तथा वास्तविक शिकायतकर्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के साथ फर्जी पहचान के संभावित इस्तेमाल पर नियंत्रण किया जा सकता है।
एक ही शिकायत बार बार आने पर एआई की भूमिका
आईजीआरएस के संभावित नए स्वरूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका भी प्रस्तावित की गई है। एक ही विषय पर बार बार या शब्दों में मामूली परिवर्तन करके प्रस्तुत की जाने वाली शिकायतों की स्वतः पहचान कर उन्हें समेकित करने की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है। उर्वशी शर्मा के प्रस्ताव के अनुसार ऐसी तकनीक प्रशासन को समान विषय से संबंधित शिकायतों की पहचान करने और उनके दोहराव को रोकने में मदद कर सकती है। साथ ही कम समय में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में आईजीआरएस शिकायतें या आरटीआई आवेदन करने वाले मामलों की जोखिम आधारित प्रशासनिक समीक्षा की व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है। आवश्यकता होने पर विधायी संशोधन के लिए केंद्र सरकार को संस्तुति भेजने की बात भी प्रस्ताव में कही गई है।
फर्जी पहचान और शिकायत आधारित अवैध लाभ पर सख्ती
प्रस्ताव में फर्जी पहचान, फर्जी दस्तावेज अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायत और आवेदन के मामलों में प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान बनाने की मांग की गई है। इसके अलावा संगठित शिकायत नेटवर्क, असामान्य शिकायत पैटर्न और संभावित ब्लैकमेल गतिविधियों की पहचान के लिए उन्नत डिजिटल विश्लेषण प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है। उर्वशी शर्मा ने शिकायतों अथवा आरटीआई के माध्यम से अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाकर धन उगाही अथवा अन्य अवैध लाभ प्राप्त करने के मामलों में तत्काल आपराधिक और विभागीय कार्रवाई तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण और परीक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित करने का भी सुझाव दिया है।
आईजीआरएस आधारित कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग
प्रस्ताव में आईजीआरएस शिकायत के आधार पर की जाने वाली प्रत्येक जांच, निरीक्षण, प्रवर्तन और ध्वस्तीकरण कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग तथा डिजिटल रिकॉर्ड को अनिवार्य करने की मांग की गई है। इसके साथ शिकायतकर्ता, आरटीआई आवेदक और अधिकारियों के बीच अधिकृत संवाद को डिजिटल माध्यम पर रिकॉर्ड करने तथा आईजीआरएस और आरटीआई प्रणाली का नियमित सुरक्षा एवं प्रक्रिया ऑडिट कराने का सुझाव भी दिया गया है।
भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संरक्षण का प्रस्ताव
प्रस्ताव में शिकायतों या आरटीआई के माध्यम से अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाकर धन उगाही अथवा अन्य अवैध लाभ प्राप्त करने के मामलों में आपराधिक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण और परीक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाए जाने की मांग की गई है। यह पहल ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन संवाद और शिकायतों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका को औपचारिक रूप से मजबूत करने की दिशा में प्रस्तावित है।
अधिकार क्षेत्र का सवाल और अधिकार सीमित नहीं करने का दावा
इसी व्यापक पृष्ठभूमि में उपलब्ध दूसरे सरकारी दस्तावेज में भ्रष्टाचार निवारण संगठन, उत्तर प्रदेश से संबंधित कार्रवाई के दौरान आईजीआरएस शिकायत और लखनऊ विकास प्राधिकरण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का संदर्भ मिलता है। संबंधित संगठन ने मामले को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित बताया और पत्र की प्रति वहां आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने का उल्लेख किया है। उर्वशी शर्मा ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी नागरिक के वैधानिक अधिकारों को सीमित करना नहीं बल्कि आईजीआरएस और आरटीआई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और दुरुपयोग से सुरक्षित बनाना है। उन्होंने वास्तविक शिकायतकर्ताओं के अधिकार सुरक्षित रखने तथा ब्लैकमेल, अवैध धन उगाही और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। सरकारी अभिलेख में उर्वशी शर्मा को सामाजिक कार्यकर्ता और सूचना का अधिकार कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इस प्रस्ताव में आईजीआरएस को केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम न मानकर उसके पूरे संचालन तंत्र में तकनीकी, प्रशासनिक और जवाबदेही संबंधी सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अब नजर शासन के अगले कदम पर
आईजीआरएस रिकॉर्ड में इस प्रकरण की कार्रवाई के सामने इसे नीति विषयक बताते हुए कहा गया है कि इसमें समय लगने की संभावना है। हालांकि उपलब्ध अभिलेख में अभी आईजीआरएस व्यवस्था में किसी अंतिम परिवर्तन को लागू किए जाने की घोषणा नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे आईजीआरएस व्यवस्था में संभावित बदलाव के लिए शासन के समक्ष रखे गए व्यापक प्रस्ताव के रूप में देखा जाना अधिक सटीक होगा। यदि इन प्रस्तावों पर शासन स्तर पर निर्णय होता है, तो भविष्य की आईजीआरएस व्यवस्था में शिकायतकर्ता की डिजिटल पहचान, एआई आधारित शिकायत विश्लेषण, दोहराव वाली शिकायतों का समेकन, प्रवर्तन कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण जैसे पहलू पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उर्वशी शर्मा का यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल माध्यमों से जनशिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य शिकायत व्यवस्था को कमजोर करना नहीं बल्कि उसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और दुरुपयोग से सुरक्षित बनाना है।