हिसार में बोले मुख्यमंत्री नायब सैनी: सतत कपास उत्पादन और फसल विविधीकरण से होगा जल संसाधनों का संरक्षण

हिसार में बोले मुख्यमंत्री नायब सैनी: सतत कपास उत्पादन और फसल विविधीकरण से होगा जल संसाधनों का संरक्षण

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिसार के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेले का शुभारंभ किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित नवीनतम तकनीकों की जानकारी ली।

  • मुख्यमंत्री ने 9.94 करोड़ रुपये की लागत से बने दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया।
  • मेले में प्रदेशभर से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
  • कपास चुगाई मशीन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

कृषि पद्धतियों में बदलाव है समय की जरूरत

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रदेश में ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। सतत कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संसाधनों का संरक्षण न केवल आज की खेती की जरूरत है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित कृषि व्यवस्था का आधार भी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी गुरुवार को यहां हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेले का शुभारंभ करने के बाद किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों और अन्य उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कृषि मेला किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने मेले में प्रदर्शित कपास चुगाई मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ कपास की चुगाई करती है और हाथ से चुगाई की तुलना में समय भी आधा लगता है। सरकार कपास चुगाई और गन्ना छिलाई जैसी मशीनों को बढ़ावा दे रही है, ताकि श्रमिकों की कमी के कारण कपास और गन्ने का बुवाई क्षेत्र प्रभावित न हो।

कपास उत्पादन में आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास हरियाणा की महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है और सिरसा, फतेहाबाद, हिसार सहित आसपास के क्षेत्रों में लाखों किसान परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है। बदलते मौसम और कीटों की नई चुनौतियों को देखते हुए ऐसी तकनीक और बीज किस्में विकसित करने की जरूरत है, जो इन परिस्थितियों का बेहतर मुकाबला कर सकें। उन्होंने बताया कि कपास की खेती को लेकर 257 किसान खेत पाठशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें 7 हजार से अधिक किसानों को कपास की बिजाई से लेकर चुगाई तक हानिकारक कीटों की पहचान और बेहतर प्रबंधन के लिए जागरूक किया गया। इसके अलावा 167 किसान मेलों में कम लागत में कपास उत्पादन कर अधिक मुनाफा कमाने के उपाय बताए गए।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। राज्य सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है।

कुलपति ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने और विविधीकरण पर दिया जोर

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि हरियाणा में कपास की खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने देसी कपास का क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एचएयू बीटी-12 और एचएयू बीटी-13 कपास किस्मों का उल्लेख किया। प्रो. कम्बोज ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष करीब 25 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाता है। किसानों की सुविधा के लिए बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

45 प्रगतिशील किसान सम्मानित

मुख्यमंत्री ने कृषि मेले में प्रदेशभर से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी पालन और केंचुआ खाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 30 पुरुष और 15 महिला किसान शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए।

9.94 करोड़ की लागत से बने जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन भी किया। करीब 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़ना है। केंद्र के माध्यम से रसायन मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता में सुधार और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक फसलों के उत्पादन को लेकर किसानों को मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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