हिसार में जंतर-मंतर जाने से पहले पुलिस ने रोके युवा, किसान और सामाजिक संगठनों ने थाने के बाहर जताया रोष

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन होना था। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हिसार के लगभग दो दर्जन से अधिक युवा जा रहे थे। पुलिस ने शुक्रवार तड़के राजगढ़ रोड पर इन युवाओं को रोक लिया और हिरासत में ले लिया।
- हिसार में जंतर-मंतर जाने से पहले पुलिस ने लगभग दो दर्जन से अधिक युवाओं को हिरासत में लिया।
- सुबह चार बजे राजगढ़ रोड पर पुलिस ने युवाओं को रोका और सिविल लाइन थाना लेकर गई।
- युवाओं को हिरासत में लेने की सूचना मिलते ही किसान और सामाजिक संगठनों के लोग थाने पहुंचे।
- करीब नौ घंटे बाद पुलिस ने सभी 28 युवाओं को रिहा कर दिया जिसके बाद धरना रद्द कर दिया गया।
राजगढ़ रोड पर सुबह चार बजे की गई कार्रवाई
दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर एक प्रस्तावित प्रदर्शन होने जा रहा था। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हिसार के लगभग दो दर्जन से अधिक युवा शुक्रवार तड़के हिसार से रवाना हुए थे। पुलिस को इन युवाओं के दिल्ली जाने की पक्की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने तड़के करीब चार बजे राजगढ़ रोड पर इन सभी युवाओं को रोक लिया।
सिविल लाइन थाने पहुंचे किसान और सामाजिक संगठन
इस दौरान युवाओं ने पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। लेकिन पुलिस सभी युवाओं को उनके वाहनों के साथ सिविल लाइन थाना ले गई। पुलिस द्वारा युवाओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना तुरंत फैल गई। सूचना मिलते ही विभिन्न किसान और सामाजिक संगठनों के लोग बड़ी संख्या में सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सभी लोगों ने युवाओं को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए अपना भारी रोष जताया।
हिरासत में लिए गए प्रमुख युवा और नेताओं के बयान
पुलिस की हिरासत में लिए गए युवाओं में फतेहाबाद बार एसोसिएशन के प्रधान शाहनवाज भट्टी शामिल थे। इसके अलावा डीवाईएफआई के राज्य अध्यक्ष मुकेश, प्रदीप बेनीवाल और पंकज बगला सहित अन्य कई युवा भी इसमें शामिल बताए गए। युवाओं को थाने में बंद रखने की सूचना मिलने पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। किसान नेता शमशेर नंबरदार ने कहा कि युवा अपनी आवाज उठाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में देश के हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को इस तरह रास्ते में रोकना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी एक बार बड़ी संख्या में युवा मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की मांग को लेकर कई घंटों तक सड़क पर बैठे रहे थे।
नौ घंटे बाद सभी युवाओं को किया गया रिहा
करीब नौ घंटे तक लगातार थाने में बंद रखने के बाद आखिरकार दोपहर के समय पुलिस ने सभी 28 युवाओं को छोड़ दिया। युवाओं की सुरक्षित रिहाई होने के बाद थाने के बाहर प्रस्तावित धरना और आंदोलन के कार्यक्रम को सामाजिक एवं किसान संगठनों ने पूरी तरह से रद्द कर दिया।