हिसार के सरहेड़ा में किसान संगठनों के विरोध के बाद रुकी मकान की कुर्की, बैंक ने दिया आश्वासन

हिसार के गांव सरहेड़ा में किसान अशोक कुमार के मकान की कुर्की के आदेश के खिलाफ शुक्रवार को हजारों किसान-मजदूर एकजुट हुए। हिसार, हांसी, कैथल और जींद सहित विभिन्न जिलों से आए किसान-मजदूरों ने गांव में पहुंचकर सभा की और मकान की कुर्की का कड़ा विरोध किया।
सुबह से बड़ी संख्या में किसान-मजदूरों के पहुंचने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद बैंक कर्मचारियों के संपर्क करने पर किसान नेताओं के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बरवाला एसडीएम कार्यालय में जाकर बैंक अधिकारियों और तहसीलदार के साथ बातचीत की।
लोन और बीमारी से जुड़ी जानकारी
संयुक्त किसान-मजदूर बाडोपट्टी टोल कमेटी के अध्यक्ष सरदानंद राजली ने बताया कि सरहेड़ा निवासी अशोक कुमार ने वर्ष 2021 में 21 लाख रुपये का लोन लिया था। इस 21 लाख रुपये के लोन में से करीब सात लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
लोन पास करवाने वाले बिचौलिए ने दो लाख 45 हजार रुपये कमीशन के रूप में लिए थे। पिछले करीब एक साल से अशोक कुमार शुगर की बीमारी से जूझ रहे हैं और 18 हजार रुपये की मासिक किस्त के कारण अब आर्थिक तंगी में किस्त चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
प्रशासन की अनुपस्थिति और बैंक के साथ बैठक
किसान संगठनों के अनुसार पिछले वर्ष भी मकान की कुर्की के नोटिस जारी किए गए थे। शुक्रवार को जब बड़ी संख्या में किसान-मजदूर गांव पहुंचे तो प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं आया।
दोपहर बाद बैंक की ओर से बातचीत का बुलावा मिलने पर अध्यक्ष मंडल ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम कार्यालय भेजा। तहसीलदार, बैंक मैनेजर और बैंक के वकील के साथ हुई बैठक में बैंक मैनेजर ने आश्वासन दिया कि अशोक कुमार के मकान की कुर्की बिल्कुल नहीं की जाएगी।
सोमवार तक सेटलमेंट पर मिलेगी जानकारी
लोन के सेटलमेंट के संबंध में सोमवार तक टोल कमेटी को स्थिति से अवगत कराने की बात भी कही गई है। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि अशोक कुमार उचित सेटलमेंट होने पर शेष राशि का भुगतान कर लोन का समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस सभा की संयुक्त अध्यक्षता शमशेर सिंह नंबरदार, सितेंद्र कोथ, मियां सिंह बिठमड़ा, नरेश भ्याण, बिंद्र नंबरदार, जयबीर लौहान और रामफल सरहेड़ा ने की। प्रतिनिधिमंडल में सरदानंद राजली, गुरनाम सिंह कैथल, धोला जेवरा, सरबत पूनिया, सूरजमल ढाड, अनिल बैंदा, दशरथ मलिक, कर्मबीर जलंधरा सहित अन्य किसान नेता और अशोक कुमार व उनकी पत्नी शामिल रहे।