हिसार के राजकीय महिला कॉलेज में हुई संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता, छात्राओं ने दिखाया उत्साह

हिसार के राजकीय महिला कॉलेज में हुई संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता, छात्राओं ने दिखाया उत्साह

हिसार, 30 सितंबर। राजकीय महिला कॉलेज में संस्कृत विभाग के तत्वावधान में संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता संस्कृत विभाग के प्रभारी डॉ. अमित कुमार के मार्गदर्शन में बुधवार को हुई। महाविद्यालय की छात्राओं ने इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लिया। छात्राओं ने विभिन्न संस्कृत श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, भाव और प्रभावशाली प्रस्तुति के साथ पाठ किया।

  • राजकीय महिला कॉलेज हिसार में हुई प्रतियोगिता
  • डॉ. अमित कुमार के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
  • बीए तृतीय वर्ष की छात्रा साक्षी ने प्राप्त किया प्रथम स्थान

निर्णायक मंडल की भूमिका और परिणाम

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इस प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका श्री रोहित, आशा एवं मोनिका ने निभाई। निर्णायकों ने छात्राओं के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। मूल्यांकन का आधार छात्राओं का उच्चारण, स्वर, लय, शुद्धता, स्मरण शक्ति और भावाभिव्यक्ति रहा। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की गई। प्रतियोगिता में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा साक्षी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा बीए तृतीय वर्ष की छात्रा निशु ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा अमीषा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

संस्कृत भाषा का महत्व और डॉ. अमित कुमार के विचार

प्रतियोगिता के प्रभारी डॉ. अमित कुमार ने छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, ज्ञान, संस्कार एवं जीवन-मूल्यों की समृद्ध परंपरा की वाहक है। संस्कृत के श्लोकों में जीवन को सही दिशा देने वाले अमूल्य संदेश निहित हैं। श्लोकों के नियमित उच्चारण से एकाग्रता बढ़ती है। इससे स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास, उच्चारण कौशल और सकारात्मक सोच के विकास में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से कई मूल्य विकसित होते हैं। इनमें सत्य, संयम, अनुशासन, कर्तव्य तथा माता-पिता एवं गुरु के प्रति सम्मान जैसे मूल्य शामिल हैं। उन्होंने छात्राओं से एक आह्वान किया। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे संस्कृत के श्लोकों का केवल पाठ न करें। उन्हें उनके अर्थ और जीवनोपयोगी संदेश को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति और संस्कारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने वाली भाषा है। संस्कृत साहित्य में निहित नैतिक एवं मानवीय मूल्यों को वर्तमान जीवन में भी अपनाया जा सकता है।

प्राचार्य सतीश कुमार का संदेश

महाविद्यालय के प्राचार्य सतीश कुमार ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्राओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करती हैं। ये प्रतियोगिताएं उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया। उन्होंने छात्राओं को संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा के अध्ययन एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया। अंत में उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी छात्राओं को शुभकामनाएं दीं।

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