हिसार में किलोमीटर स्कीम की बसों से बढ़ रही दुर्घटनाएं, रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने जताया कड़ा विरोध

हिसार में किलोमीटर स्कीम की बसों से बढ़ रही दुर्घटनाएं, रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने जताया कड़ा विरोध

हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही बसों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यूनियन का कहना है कि इन बसों के कारण लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी चालकों की छवि भी खराब हो रही है, जो पूरी तरह से गलत है।

  • यूनियन ने किलोमीटर स्कीम का ठेका खत्म करने की मांग की
  • बसों को रोडवेज के नियमित बेड़े में शामिल करने पर जोर

हिसार में रोडवेज नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल

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हिसार से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा कर्मचारी महासंघ व एटक से संबंधित रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा के नेताओं ने शुक्रवार को बड़ा आरोप लगाया है। राज्य प्रधान निशान सिंह, राज्य महासचिव जयवीर घणघस, हिसार डिपो प्रधान संदीप जैनावास व डिपो सचिव प्रदीप डाबड़ा ने यह बयान दिया है। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि किलोमीटर स्कीम की बसों के चालक अप्रशिक्षित हैं और उन्हें ठेके पर रखा गया है। इसी कारण से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।

सरकारी बसों जैसा रंग-रूप होने से फैल रहा भ्रम

यूनियन नेताओं ने अपनी बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि किलोमीटर स्कीम की बसों का रंग-रूप हूबहू हरियाणा रोडवेज की सरकारी बसों जैसा ही है। ऐसे में जब कोई दुर्घटना होती है, तो आम जनता में भारी भ्रम पैदा हो जाता है। जनता यह समझती है कि हादसा किसी सरकारी रोडवेज बस के चालक की लापरवाही की वजह से हुआ है। नेताओं ने कहा कि इससे प्रशिक्षित और पूरी ईमानदारी के साथ कार्य कर रहे सरकारी चालकों की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण पूरे रोडवेज विभाग की साख को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

सरकार को कई बार सौंपा जा चुका है ज्ञापन

रोडवेज नेताओं ने मीडिया को बताया कि यूनियन की ओर से इस पूरे मामले को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई है कि किलोमीटर स्कीम का ठेका तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। यूनियन नेताओं ने सरकार के सामने यह प्रमुख मांग रखी है कि किलोमीटर स्कीम के तहत संचालित हो रही सभी बसों को हरियाणा रोडवेज के नियमित बेड़े में शामिल किया जाए। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि इन बसों पर केवल नियमित और प्रशिक्षित सरकारी चालकों की ही नियुक्ति की जाए।

यात्रियों की सुरक्षा और विभाग की साख का मामला

यूनियन नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के बदलाव करने से यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अलावा रोडवेज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर और सरकारी चालकों की साख को लेकर जो भ्रम पैदा हो रहा है, उसे भी आसानी से दूर किया जा सकेगा। सरकार को इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि जनता में फैल रहा भ्रम समाप्त हो सके।

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