हिसार में रोडवेज कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, महाप्रबंधक पर लगाए मनमानी के आरोप

हिसार में रोडवेज कर्मचारियों ने महाप्रबंधक की मनमानी और पिछले लगभग पांच महीने से लंबित मांग पत्र पर कोई कार्रवाई न किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने रोडवेज प्रांगण में विशाल गेट मीटिंग करके अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। 15 सूत्रीय मांगपत्र पर कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी रोष देखा जा रहा है। इस गेट मीटिंग और धरने में सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लेकर कड़ा विरोध जताया।
सांझा संघर्ष समिति का गठन और 15 सूत्रीय मांगपत्र
इस साल 29 अप्रैल को हिसार डिपो की सभी यूनियनों ने एकजुट होकर सांझा संघर्ष समिति का गठन किया था। इसके बाद 15 सूत्रीय मांगपत्र महाप्रबंधक को सौंपा गया था। काफी समय बीतने के बावजूद एक-दो मांगों को छोड़कर अधिकांश समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि एलटीसी, मेडिकल बिल, शिक्षा भत्ता, रात्रि भत्ता और एसीपी सहित कई कर्मचारी लाभ लंबे समय से लंबित हैं। इन लंबित लाभों के कारण कर्मचारियों को भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महाप्रबंधक की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप और जांच की मांग
गेट मीटिंग के दौरान महाप्रबंधक की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी खुलकर रोष जताया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कार्यालय में फाइलों के निपटारे में देरी की जा रही है, जिसके कारण उनके लाभ संबंधी मामले लंबित पड़े हैं। कर्मचारियों ने इन सभी आरोपों की विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मांगों का समाधान करने के बजाय महाप्रबंधक यह भ्रम फैलाकर गुमराह कर रहे हैं कि अधिकतर मांगों का समाधान कर दिया गया है। वक्ताओं ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि महाप्रबंधक अपनी बात पर कायम हैं, तो वे कर्मचारियों के सामने मंच पर आकर बताएं कि कौन सी मांग पूरी हुई है।
धरना जारी रखने का ऐलान और बातचीत से इंकार
इस अनिश्चितकालीन धरने के दौरान संदीप जैनावास, कर्मबीर मसूदपुर, अनूप श्योकद, बजरंग लाखा, जोगेंद्र पंघाल, अरुण शर्मा, जितेंद्र शर्मा, नरेंद्र खरड़, अमित जुगलान और पवन कनोह सहित अनेक कर्मचारी नेता मौजूद रहे। कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी रहेगा। उन्होंने सरकार और परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि उनकी इन सभी लंबित समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो सके। हालांकि धरना शुरू होने के बाद महाप्रबंधक ने सांझा संघर्ष समिति को बातचीत के लिए बुलाया था और एक माह का और समय मांगा था। लेकिन समिति ने यह कहते हुए महाप्रबंधक का यह प्रस्ताव मानने से साफ इंकार कर दिया कि वे पहले ही पांच महीने का लंबा समय दे चुके हैं।