हिसार: जीजेयू में पीओएसएच एक्ट पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित, विद्यार्थियों को दी कार्यस्थल सुरक्षा की जानकारी

गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम, 2013 यानी POSH Act पर एक जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया गया। कक्षा से निकलकर विद्यार्थी जब इंटर्नशिप, शोध और रोजगार की दुनिया में कदम रखते हैं तो उनके लिए केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सुरक्षित कार्य वातावरण की जानकारी भी बहुत जरूरी होती है।
बियोंड द क्लासरूम: अंडरस्टेंडिंग दा पीओएसएच एक्ट
इस विषय पर आयोजित किए गए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में 250 से अधिक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों व शोधार्थियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून की पूरी जानकारी दी गई ताकि वे अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक हो सकें।
कानूनी प्रावधान और विशेषज्ञ के विचार
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय से आमंत्रित किए गए मुख्य वक्ता डॉ. नरेश महिपाल ने पीओएसएच एक्ट के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि किस तरह के आचरण को यौन उत्पीड़न की श्रेणी में माना जा सकता है और ऐसी स्थिति में शिकायत दर्ज कराने तथा उसके निवारण की निर्धारित प्रक्रिया क्या है। उन्होंने आंतरिक समिति की भूमिका, संबंधित कानूनी समय-सीमाओं तथा एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण बनाए रखने में प्रत्येक व्यक्ति एवं संस्थान की जिम्मेदारियों को भी बहुत सरल तरीके से समझाया। डॉ. महिपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून के प्रति यह जागरूकता विद्यार्थियों को अनुचित व्यवहार पहचानने और अपनी चिंताओं को उचित माध्यम के सामने रखने में सक्षम बनाती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को स्पीक अप, स्टेंड अप एंड स्पीक आउट यानी आवाज उठाएं, दृढ़ता से खड़े हों और खुलकर बोलें का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता, पारस्परिक सम्मान और जिम्मेदार आचरण ही परिसर और भविष्य के कार्यस्थलों में सुरक्षा, गरिमा एवं समानता की संस्कृति का मुख्य आधार हैं।
महिला प्रकोष्ठ का उद्देश्य
महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा प्रो. दीपा मंगला ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय का परिसर हमेशा ऐसा होना चाहिए जहां प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह सम्मानित और सुरक्षित महसूस करे तथा बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सके। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से व्यक्तिगत सीमाओं को समझने और उनका पूरा सम्मान करने के साथ-साथ उनके उल्लंघन की स्थिति में उपलब्ध संस्थागत तंत्र की पूरी जानकारी रखने का विशेष आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए पीओएसएच एक्ट की जानकारी इसलिए भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, परिसर, इंटर्नशिप और अन्य सभी संस्थागत गतिविधियों में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। इस विशेष कार्यक्रम का समापन महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय सदस्य डॉ. तरुणा के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस पूरे आयोजन के दौरान डॉ. सुनीता, डॉ. तरुणा और डॉ. मनप्रीत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।