हिसार कृषि मेले में उमड़ी किसानों की भारी भीड़, 350 स्टॉल पर मिली आधुनिक तकनीकों की जानकारी

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला रबी-2026 शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस बार मेले का थीम सतत कपास उत्पादन-फसल विविधीकरण एवं जल संसाधन सुरक्षा रखा गया था। मेले के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि कृषि मेला किसानों के लिए ज्ञान, आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम है। विश्वविद्यालय किसानों की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नई कृषि तकनीकों तथा मशीनरी के विकास पर लगातार कार्य कर रहा है।
- कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
- विश्वविद्यालय ने कपास की चुगाई के लिए बड़ी मशीन विकसित की है, जो एक एकड़ कपास की चुगाई करीब 45 मिनट में कर सकती है।
- छोटे एवं मध्यम किसानों की सुविधा के लिए कम आकार की और सुविधाजनक मशीन तैयार करने पर भी कार्य किया जाएगा।
- वैज्ञानिक कपास की ऐसी उन्नत किस्में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनके पौधों की ऊंचाई सीमित हो, ताकि मशीन से चुगाई आसानी से की जा सके।
फसल विविधीकरण और आय बढ़ाने पर जोर
प्रो. कम्बोज ने कहा कि फसल विविधीकरण कृषि की स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसानों को धान-गेहूं के परंपरागत फसल चक्र पर निर्भरता कम कर मक्का, दलहन, तिलहन, कपास, सब्जियों तथा अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ कृषि जोखिम और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए भविष्य में कृषि मेले के मेला ग्राउंड परिसर का विस्तार किया जाएगा।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे किसान और लगे 350 स्टॉल
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय के 56 वर्ष के इतिहास में इस बार कृषि मेला रबी-2026 में किसानों की अभूतपूर्व भागीदारी रही। किसानों की भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों और निजी क्षेत्र की कंपनियों की ओर से नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए इस बार 350 स्टॉल लगाए गए, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है।
प्रश्नोत्तरी सत्र और अतिथियों की उपस्थिति
मेले में आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में किसानों ने विभिन्न फसलों, बीमारियों, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने जवाब दिया। मंच संचालन डॉ. कनिका रानी और श्वेता ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, अधिकारी, कृषि विभाग के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, किसान और बड़ी संख्या में कृषि हितधारक मौजूद रहे।