हिसार कृषि विश्वविद्यालय में सरसों की बिजाई शुरू, कुलपति ने किसानों को दी उन्नत तकनीक अपनाने की सलाह

हिसार में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. रामधन सिंह बीज फार्म में कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने किसानों की मौजूदगी में सरसों की बिजाई का शुभारंभ किया है। इस विशेष अवसर पर उन्होंने सभी किसानों से सरसों की बिजाई वैज्ञानिक तरीके से करने और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया है।
सरसों है हरियाणा की प्रमुख फसल
कुलपति ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि सरसों हरियाणा की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि समय पर बिजाई की जाए और खेत की उचित तैयारी की जाए। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि विश्वविद्यालय द्वारा सुझाई गई उन्नत किस्मों और कृषि तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए।
20 अक्टूबर तक की जा सकती है बिजाई
उन्होंने बताया कि मौसम की वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार हरियाणा में सरसों की बिजाई 20 अक्टूबर तक की जा सकती है। यदि किसान समय पर बिजाई करते हैं तो फसल को अनुकूल मौसम मिलता है और पौधों की बहुत अच्छी वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों को निर्देश दिए कि किसानों को अपने क्षेत्र, सरसों की किस्म और सिंचाई सुविधा को ध्यान में रखते हुए बिजाई का समय तय करना चाहिए।
खेत में नमी का होना है जरूरी
बिजाई के समय यह बहुत आवश्यक है कि खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। यदि मिट्टी बहुत अधिक सूखी है या फिर बहुत अधिक गीली है तो बीज का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि सरसों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी जरूरी है।
वैज्ञानिकों की सलाह से होगी बेहतर आय
उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि सरसों की बिजाई और फसल प्रबंधन के लिए हकृवि के कृषि वैज्ञानिकों एवं विस्तार विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कार्य करना चाहिए। ऐसा करने से किसान बेहतर पैदावार के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। फार्म के निदेशक-कम-नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजय ठकराल ने बताया कि डॉ. रामधन सिंह बीज फार्म 2752 एकड़ में फैला हुआ है।
उपलब्ध कराई जाती हैं उन्नत किस्में
इस विशाल फार्म पर किसानों को उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध करवाने के लिए रबी और खरीफ फसलों की बिजाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा सरसों की अनेक उन्नत किस्में विकसित की गई हैं। इन उन्नत किस्मों की बिजाई करके किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
प्रमुख उन्नत किस्में और उपस्थिति
विश्वविद्यालय द्वारा विकसित प्रमुख किस्मों में आरएच 1975, आरएच 725, आरएच 1424, आरएच 1706 और आरएचएच 2101 सहित अन्य किस्में शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर लैंडस्केप यूनिट के प्रभारी डॉ. अरविंद मलिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एके ढाका, कई कर्मचारी और किसान उपस्थित रहे।