हिसार कृषि विश्वविद्यालय में आयुर्वेद दिवस पर कार्यशाला, कुलसचिव बोले- औषधीय पौधों का विशेष महत्व

हिसार कृषि विश्वविद्यालय में आयुर्वेद दिवस पर कार्यशाला, कुलसचिव बोले- औषधीय पौधों का विशेष महत्व

हिसार में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में आयुर्वेद दिवस-2026 के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया है। यह कार्यशाला औषधीय, सुगंध एवं क्षमतावान फसल अनुभाग तथा अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग द्वारा आयोजित की गई है। इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'एक सेहतमंद कल की शुरुआत, चमत्कारी आयुर्वेद के साथ' रखा गया था। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पवन कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे हैं। मंच पर मुख्य वक्ता डॉ. महिपाल सिंह, अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पाहुजा, समाजसेवी सुमित्रा मंगाली और डॉ. एएस ढांडा भी मौजूद रहे हैं।

आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति

कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने अपने संबोधन में कहा है कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। आयुर्वेद का मूल उद्देश्य केवल किसी रोग का उपचार करना नहीं है, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग का उपचार करना है। उन्होंने कहा है कि आयुर्वेद हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। आयुर्वेद में औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का विशेष महत्व होता है। भारत की जैव विविधता ने इस परंपरा के विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस समृद्ध विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर प्रमाण आधारित तरीके से आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वर्तमान समय में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, अनुसंधान और प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

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स्वास्थ्य, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन

मुख्य वक्ता डॉ. महिपाल सिंह ने विभिन्न प्रकार की बीमारियों और उनके उपचार में आयुर्वेद की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि आयुर्वेद हमें यह सिखाता है कि स्वास्थ्य केवल किसी रोग का अभाव नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और जीवनशैली के बीच एक संतुलन का नाम है। हमारे ऋषियों ने प्रकृति का गहन अध्ययन किया था और यह समझने का प्रयास किया था कि मानव जीवन प्रकृति से अलग नहीं है, बल्कि उसका एक अभिन्न हिस्सा है। इसलिए आयुर्वेद में प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति को विशेष महत्व दिया गया है। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने अपने संबोधन में कहा है कि औषधीय एवं सुगंधित फसलों को बढ़ावा देकर किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक एवं लाभकारी कृषि विकल्प उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान, तकनीकी मार्गदर्शन और नवीन कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

कार्यक्रम में समाजसेवी सुमित्रा मंगाली और डॉ. एएस ढांडा ने भी अपने विचार साझा किए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पाहुजा ने कार्यक्रम में आए सभी लोगों का स्वागत किया है और आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है। मंच संचालन और धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. राजेश आर्य द्वारा पारित किया गया है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक, मौलिक विज्ञान व महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय विशिष्ट सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे हैं।

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