हिसार में कचरा उठान को लेकर सफाई कर्मचारियों और पुलिस के बीच टकराव, महिलाओं ने फेंकी कचरे की थैलियां

हिसार में कचरा उठान को लेकर सफाई कर्मचारियों और पुलिस के बीच टकराव, महिलाओं ने फेंकी कचरे की थैलियां

हिसार के सातरोड़ में कचरा उठाने पहुंची नगर निगम टीम और पुलिस का हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने भारी विरोध किया। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी धक्का-मुक्की हुई।

हरियाणा के हिसार शहर में सफाई व्यवस्था को दोबारा ढर्रे पर लाने के लिए नगर निगम प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को निगम की ओर से कचरा उठान का कार्य शुरू किया गया, जो सातरोड़ क्षेत्र में एक बड़े टकराव में बदल गया। अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने पुलिस सुरक्षा के बीच काम करने पहुंची निगम की टीम का कड़ा विरोध किया।

हिसार /27 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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हिसार के सातरोड़ इलाके में गुरुवार को नगर निगम की टीम जब कचरा उठाने पहुंची तो हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों के साथ टकराव हो गया। पुलिस सुरक्षा के बीच यह कार्रवाई हुई। कर्मचारियों ने विरोध जताया और नारेबाजी की।

शहर में पिछले कई दिनों से सफाई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। हड़ताल के कारण जगह-जगह कचरा जमा हो गया है। नगर निगम प्रशासन ने व्यवस्था बहाल करने के लिए अभियान तेज किया है। सातरोड़ में भी यही कोशिश की गई।

कर्मचारियों को पहले से पता था कि प्रशासन पुलिस बल के साथ कचरा उठाने आएगा। निगम की टीम जैसे ही पहुंची, प्रदर्शनकारी चारों तरफ से घेर गए। महिला और पुरुष दोनों कर्मचारी मौके पर आ गए।उन्होंने जोर-जोर से नारे लगाए। कचरा उठाने की कार्रवाई रोकने की पूरी कोशिश की। पुलिस ने स्थिति संभालने की कोशिश की। दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और खींचतान शुरू हो गई।

कुछ महिला सफाई कर्मचारियों ने सड़क पर पड़ा कचरा और थैलियां उठाकर पुलिसकर्मियों की ओर फेंक दीं। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।महिला पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को पीछे हटाने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बस में बैठाने का प्रयास भी हुआ। कर्मचारियों ने इसका भी विरोध किया।

यह घटना हड़ताल के लंबे दौर में हुई है। हरियाणा में सफाई कर्मचारी कई दिनों से हड़ताल पर हैं। हिसार में भी सैकड़ों कर्मचारी शामिल हैं। उनकी मुख्य मांगें नियमितीकरण, बेहतर वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने से जुड़ी हैं।पिछले दिनों भी शहर के अन्य इलाकों में इसी तरह की घटनाएं हुईं। आईटीआई चौक समेत कई जगहों पर प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा में कचरा उठाने की कोशिश की थी। वहां भी विरोध हुआ और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया।

शहर में कचरे के ढेर लग गए हैं। अधिकारियों के अनुसार हजारों टन कचरा जमा हो चुका है। घरों से कचरा नहीं उठ रहा। सड़कों, बाजारों और मोहल्लों में गंदगी फैल रही है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि वह वैकल्पिक व्यवस्था से कचरा उठाने की कोशिश कर रहा है। डंपर, जेसीबी और अन्य वाहनों का इस्तेमाल हो रहा है। कुछ इलाकों में देर रात या सुबह के समय अभियान चलाए गए।सातरोड़ की घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण बना रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश जारी रखी। दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई।

हालत बिगड़ते देख हिसार के मेयर प्रवीण पोपली और निगम कमिश्नर ने आपात बैठक बुलाई। इसमें पार्षद, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, व्यापारी संगठन और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बुलाया गया।

मेयर ने सभी से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण शहर में कचरा जमा हो गया है। निगम लगातार कोशिश कर रहा है लेकिन कुछ जगहों पर विरोध के कारण मुश्किलें आ रही हैं। शहरवासियों से साफ-सफाई में मदद मांगी गई।कर्मचारी यूनियन का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि सरकार पहले किए गए वादों पर अमल नहीं कर रही। मई में हुई बैठक में कई मांगें मानने का आश्वासन दिया गया था लेकिन आदेश जारी नहीं हुए। नियमितीकरण की मुख्य मांग पर अटकाव है।

यूनियन के अनुसार राज्य भर में हजारों संविदा कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्हें पक्का करने और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग है। ठेका प्रथा खत्म करने की भी बात कही जा रही है।हड़ताल के दौरान कई बार प्रशासन और कर्मचारियों के बीच आमना-सामना हुआ है। कुछ जगहों पर कर्मचारियों ने मशीनों पर चढ़ने या गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। पुलिस ने कई बार हिरासत में लेने की कार्रवाई की। ज्यादातर मामलों में बाद में छोड़ दिया गया।

शहर के लोग इस स्थिति से परेशान हैं। कई इलाकों में कचरा सड़ने लगा है। मक्खियां और बदबू की शिकायतें आम हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और खराब होने का डर है। नालों की सफाई भी प्रभावित हुई है।प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द कचरा हटाया जाए। अलग-अलग क्षेत्रों में टीमें भेजी जा रही हैं। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

सातरोड़ की घटना में महिला कर्मचारियों की भूमिका प्रमुख रही। उन्होंने सक्रिय रूप से विरोध किया। पुलिस की महिला टीम भी मौके पर मौजूद थी। दोनों तरफ से प्रयास हुए कि स्थिति नियंत्रण में रहे।इस पूरे प्रकरण से साफ है कि हड़ताल लंबी खिंच रही है। बातचीत के प्रयास होते रहे हैं लेकिन अंतिम समाधान नहीं निकला। हाल ही में कुछ मांगों पर सहमति बनी थी लेकिन मुख्य मुद्दे पर कानूनी राय लेने की बात कही गई।शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन अभियान जारी रखे हुए है। कर्मचारियों का विरोध भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या जल्द हल होनी चाहिए। कचरा उठान नियमित रूप से शुरू हो ताकि रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो। स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों के लिए यह जरूरी है।नगर निगम की टीम सातरोड़ में कचरा उठाने की कोशिश करती रही। कर्मचारियों के भारी विरोध के बावजूद प्रशासन ने अपना रुख साफ रखा कि शहर की सफाई जरूरी है।पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की गई। कुछ को हिरासत में लिया गया ताकि कार्रवाई आगे बढ़ सके।

यह घटना पूरे राज्य में चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। कई जिलों में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई। कचरा उठान को लेकर टकराव की खबरें आईं।हिसार में मेयर की बैठक के बाद उम्मीद है कि सहयोग बढ़ेगा। संगठनों से अपील की गई कि वे सफाई में मदद करें। नागरिक भी अपना कचरा सही जगह डालें।कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक वादा पूरा नहीं होता हड़ताल जारी रहेगी। प्रशासन कहता है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए समाधान निकाला जाएगा।

सातरोड़ की घटना ने एक बार फिर ध्यान दिलाया कि समस्या गहरी है। शहर में कचरे के ढेर स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। प्रशासन और कर्मचारी दोनों को जल्द समाधान निकालना चाहिए।लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। बाजारों में गंदगी, घरों के आसपास कचरा और सड़कों पर बिखरा कूड़ा आम दृश्य बन गया है। कई परिवार खुद कचरा जला रहे हैं या दूर फेंक रहे हैं।नगर निगम का अभियान जारी है। अलग-अलग इलाकों में टीमें काम कर रही हैं। पुलिस सुरक्षा के साथ यह काम हो रहा है। सातरोड़ जैसी घटनाएं चुनौती बढ़ा रही हैं।

इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के अपने तर्क हैं। कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी और भविष्य की सुरक्षा की बात करते हैं। प्रशासन शहर की सफाई और नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी निभाने की बात करता है।गुरुवार की घटना में तनाव बढ़ा जरूर लेकिन बड़े स्तर पर कोई गंभीर हिंसा की खबर नहीं आई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की।

मेयर और निगम अधिकारियों की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। सहयोग बढ़ाने और वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।शहरवासियों से अपील है कि वे धैर्य रखें और सफाई में अपना योगदान दें। हड़ताल का समाधान जल्द निकले तो स्थिति सामान्य हो सकती है।सातरोड़ में हुई घटना की जानकारी स्थानीय स्तर पर फैली। सोशल मीडिया पर भी वीडियो और तस्वीरें शेयर हुईं। इनमें धक्का-मुक्की और कचरा फेंकने के दृश्य दिखे।

प्रशासन का कहना है कि ऐसे विरोध से समस्या हल नहीं होती। बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। कर्मचारी भी अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने की बात करते हैं।हिसार की सफाई व्यवस्था बहाल करने का अभियान जारी रहेगा। नगर निगम की टीमें अन्य इलाकों में भी काम कर रही हैं। पुलिस बल तैनात रहेगा।

यह समाचार राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा क्योंकि हरियाणा के कई शहरों में समान स्थिति है। कचरा संकट और कर्मचारियों की हड़ताल दोनों मुद्दे जुड़े हुए हैं।अंत में स्थिति यह है कि सातरोड़ में टकराव हुआ, तनाव बढ़ा, पुलिस ने नियंत्रण किया और प्रशासन ने सहयोग की अपील की। शहर की सफाई का काम जारी रखने का प्रयास हो रहा है। समाधान के लिए बातचीत जारी रहनी चाहिए।

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