हिसार: 1134 करोड़ रुपये की एफएसए वसूली याचिका खारिज, बिजली उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

हरियाणा विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली निगमों की 1134.54 करोड़ रुपये की फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट राशि की वसूली संबंधी याचिका खारिज कर दी गई है। इस फैसले से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हिसार में यह जानकारी दी।
- 1134 करोड़ रुपये की एफएसए वसूली याचिका खारिज
- निगमों की लापरवाही का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं
- वर्ष 2021 से नहीं मिला नकारात्मक एफएसए का लाभ
आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई थी आपत्ति
प्रो. संपत सिंह ने आयोग के समक्ष इस याचिका पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने कड़ा तर्क देते हुए कहा था कि बिजली कंपनियां कानून और निर्धारित समय-सीमा की अनदेखी कर सकती हैं, लेकिन वे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकती हैं।
उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का मामला
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में प्रो. संपत सिंह ने स्पष्ट किया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा नवंबर 2025 की एफएसए राशि की वसूली का प्रयास किया गया था। उनके अनुसार यह राशि निर्धारित समय के भीतर बिजली बिलों में शामिल नहीं की गई थी, जिसके कारण जनवरी 2026 में नियमों के अनुसार यह राशि जब्त हो चुकी थी। इन सब नियमों के बावजूद निगमों द्वारा दोबारा इस राशि की वसूली का असफल प्रयास किया गया था।
उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला
प्रो. संपत सिंह ने बताया कि आयोग द्वारा इस राशि की दोबारा वसूली की अनुमति न देना उपभोक्ताओं के हित में एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है। बिजली वितरण कंपनियों को हमेशा निर्धारित नियमों और तय समय-सीमा का पूरी कड़ाई से पालन करना चाहिए। निगमों की अपनी देरी अथवा उनकी प्रशासनिक लापरवाही का पूरा आर्थिक बोझ किसी भी स्थिति में आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता है।
आगामी सुनवाई में उठाए जाएंगे अन्य बड़े मुद्दे
प्रो. संपत सिंह ने आगे जानकारी दी कि वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ नहीं दिया गया है। उन्होंने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित वार्षिक राजस्व प्राप्तियों पर होने वाली आगामी सुनवाई के दौरान भी वे इन सभी गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
घरों और छोटे कारोबारों पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ
उन्होंने कहा कि फिक्स्ड चार्ज, लगातार बढ़ते बिजली शुल्क और नगर निकायों के टैक्स से आम घरों तथा छोटे कारोबारों पर बहुत अधिक अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इन सभी समस्याओं को भी आगामी सुनवाई में मजबूती से उठाया जाएगा। बिजली दरों और नियामकीय याचिकाओं की पूरी प्रक्रिया पर लगातार कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो सके। उनका साफ कहना था कि देश और जनता का पैसा हमेशा जनता के हित में ही रहना चाहिए।