हिसार में राजकीय महिला महाविद्यालय में हुआ विशेष व्याख्यान, डॉ. प्रियंका सिंगला बोलीं- अंग्रेजी साहित्य समाज और संस्कृति का दस्तावेज

हिसार में राजकीय महिला महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से एमए अंग्रेजी की छात्राओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में रिसर्च मैथडोलॉजी विषय पर विस्तार व्याख्यान के रूप में किया गया था। इस कार्यक्रम में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की चेयरपर्सन एवं शिक्षाविद् डॉ. प्रियंका सिंगला ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और विद्यार्थियों को संबोधित किया।
सांस्कृतिक अध्ययन और अंग्रेजी साहित्य की अवधारणा
डॉ. प्रियंका सिंगला ने बुधवार को अंग्रेजी साहित्य के संदर्भ में सांस्कृतिक अध्ययन की अवधारणा को समझाया। उन्होंने इस अवधारणा को भारतीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि साहित्य केवल भाषा और रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह समाज, इतिहास, संस्कृति, परंपराओं, विचारधाराओं और मानवीय अनुभवों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है।
शोध के लिए व्यापक और अंतर्विषयक दृष्टिकोण
उन्होंने भारतीय ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से सांस्कृतिक अध्ययन और अंग्रेजी साहित्य के पारस्परिक संबंधों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शोध के लिए व्यापक एवं अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय के प्राचार्य सतीश सिंगला ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बहुभाषिक ज्ञान का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया।
बहुभाषिक ज्ञान और विद्यार्थियों की सहभागिता
प्राचार्य सतीश सिंगला ने बताया कि विभिन्न भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति के ज्ञान के दायरे को विस्तृत करता है। यह ज्ञान विभिन्न संस्कृतियों एवं समाजों को समझने के नए अवसर प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विद्वानों एवं शोधार्थियों सहित अंग्रेजी विभाग के सभी शिक्षक उपस्थित रहे। अंग्रेजी विभाग की शिक्षिकाओं शालू मोहन एवं डॉ. कमलेश ने इस पूरे कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया।
शोध के प्रति रुचि और आलोचनात्मक चिंतन का विकास
व्याख्यान के दौरान सभी विद्यार्थियों ने विषय से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को अपनी नोटबुक्स में नोट किया। विद्यार्थियों ने वक्ता के साथ संवाद किया और शोध तथा सांस्कृतिक अध्ययन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझा। इस पूरे कार्यक्रम से विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि पैदा करने में मदद मिली। इससे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन तथा साहित्य को व्यापक सामाजिक-संस्कृतिक संदर्भों में देखने की दृष्टि विकसित हुई।