हिसार में बड़ा असर: नशे की गिरफ्त से बाहर निकले 319 लोग, घर-घर पहुंच रही पुलिस की नशा मुक्ति टीम

हिसार में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान अब केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। नशे की गिरफ्त में आए लोगों की पहचान, उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पुलिस के अनुसार अभियान के तहत अब तक 319 नशा पीड़ित नशा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं। ये लोग मेहनत-मजदूरी व रोजगार के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
2727 नशा पीड़ितों की निगरानी और केयरटेकर व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन के निर्देश पर नशा मुक्ति टीम ने नशा पीड़ितों की निरंतर निगरानी के लिए जिले में 181 केयरटेकर व्यवस्था लागू की है। चिन्हित किए गए 2727 नशा पीड़ितों की देखरेख के लिए 181 केयरटेकर नियुक्त किए गए हैं। ये केयरटेकर नियमित रूप से पीड़ितों के घर जाकर उनका फीडबैक लेते हैं और उनकी स्थिति पर नजर रखते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें उपचार और काउंसलिंग से भी जोड़ा जाता है।
आयुर्वेदिक दवाइयां और ड्रग पैडलोरों पर कार्रवाई
नशा मुक्ति टीम की ओर से उपचार की जरूरत वाले 602 नशा पीड़ितों को आयुर्वेदिक दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं। इसके अलावा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 338 ड्रग पैडलरों की पहचान की है। केयरटेकर लगातार इन लोगों के संपर्क में रहकर उनके स्वास्थ्य और नशा छोड़ने की स्थिति का फीडबैक ले रहे हैं। इससे जरूरत के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था की जा सकेगी।
एसपी सिद्धांत जैन का बयान और अभियान की सफलता
पुलिस के अनुसार अभियान का सकारात्मक असर यह है कि 319 लोगों ने नशा छोड़ दिया है। ये लोग अब अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं और मेहनत-मजदूरी या रोजगार के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं। एसपी सिद्धान्त जैन ने कहा कि नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर किसी व्यक्ति का सामान्य जीवन में लौटना ही नशा मुक्ति अभियान की वास्तविक सफलता है।
पुलिस की स्पष्ट नीति और सामूहिक प्रयास
एसपी सिद्धांत जैन का कहना है कि पुलिस की नीति स्पष्ट है कि नशा पीड़ितों को उपचार और सहयोग देकर सामान्य जीवन की ओर लौटाना है। साथ ही नशे का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करना भी नीति में शामिल है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को अकेला छोड़ना समाधान नहीं है। परिवार, समाज और पुलिस के सामूहिक प्रयास से उसे उपचार और सही मार्गदर्शन देकर दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ा जा सकता है।