हिसार : मधुमक्खी पालन किसानों की आय व फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक : प्रो. बीआर कम्बोज

हिसार : मधुमक्खी पालन किसानों की आय व फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक : प्रो. बीआर कम्बोज

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में मधुमक्खी पालकों का बुधवार को एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में प्रदेशभर से आए मधुमक्खी पालकों, किसानों, वैज्ञानिकों तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन हकृवि में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), हरियाणा तथा कीट विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि और गणमान्य लोग

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक डॉ. कुलदीप वर्मा और सहायक निदेशक हितेंद्र सिंह हुड्डा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज का बयान

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बुधवार को कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह फसलों के परागण में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

परागण और शहद उत्पादन के आंकड़े

मधुमक्खियों के प्रभावी परागण से फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत दुनिया के प्रमुख शहद निर्यातक देशों में शामिल है। वर्ष 2024-25 के दौरान देश के अंदर कुल 1.52 लाख मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ था।

आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान

कुलपति ने सभी मधुमक्खी पालकों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने मधुमक्खी कॉलोनियों का उचित प्रबंधन करने तथा शहद एवं अन्य मधुमक्खी उत्पादों के बेहतर मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों और मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

केवीआईसी निदेशक के विचार

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक डॉ. कुलदीप वर्मा ने सम्मेलन में मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने कॉलोनी प्रबंधन, शहद उत्पादन तथा फसलों में परागण के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने सभी मधुमक्खी पालकों को बदलती हुई परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की विशेष सलाह दी।

कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता का संबोधन

कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन किसानों, मधुमक्खी पालकों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का एक प्रभावी मंच प्रदान करते हैं। इससे मधुमक्खी पालन को स्वरोजगार और आय के एक बेहतर साधन के रूप में विकसित करने में बहुत मदद मिलती है।

कीट विज्ञान विभाग की जानकारी

कीट विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने मधुमक्खी पालन से संबंधित प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मधुमक्खी कॉलोनी के वैज्ञानिक प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

Share:

Comments

Leave a comment