हिसार में पाखंड के खिलाफ आर्य समाज ने बनाई 51 सदस्यीय संघर्ष समिति, सुबेसिंह बने अध्यक्ष

हिसार में पाखंड के खिलाफ आर्य समाज ने बनाई 51 सदस्यीय संघर्ष समिति, सुबेसिंह बने अध्यक्ष

हिसार में आर्य समाज हरियाणा के आह्वान पर नागोरी गेट स्थित आर्य समाज में जिले के सक्रिय कार्यकर्ताओं की चिंतन बैठक और पाखंड खंडन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता आर्य समाज के राष्ट्रीय महासचिव युवा संन्यासी स्वामी आदित्यवेश ने की। मंच का संचालन आर्य समाज नागोरी गेट के उपप्रधान दलबीर आर्य द्वारा किया गया। रविवार को हुई इस बैठक में आर्य समाज के संन्यासियों, विद्वानों, खाप प्रतिनिधियों और विभिन्न आर्य समाजों के पदाधिकारियों ने विशेष रूप से भाग लिया। आगामी रणनीति तैयार करने के लिए बैठक में 51 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसका अध्यक्ष सुबेसिंह आर्य मुकलान को बनाया गया।

स्वामी आदित्यवेश ने की सरकार से मांग

स्वामी आदित्यवेश ने रामपाल दास की गतिविधियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए और सक्षम न्यायालय के माध्यम से उसकी जमानत को निरस्त कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक देश के अंदर पाखंड रहेगा, तब तक आर्य समाज का यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा। गुरुकुल धीरणवास के कार्यकारी प्रधान सुबेसिंह आर्य ने कहा कि आर्य समाज पाखंड के खिलाफ बहुत मजबूती के साथ लड़ रहा है और यह संघर्ष लंबा भी चल सकता है। दलबीर आर्य ने महर्षि दयानंद के विचारों के बारे में बताया तथा स्वतंत्रता आंदोलन में आर्य समाज के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया।

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वक्ताओं ने रखे अपने विचार

यतीन्द्र आर्य ने बैठक में कहा कि संत के नाम पर समाज में भ्रम फैलाने वाले लोगों को पूरी तरह बेनकाब करना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सिम्मी काठपाल ने महिलाओं की शिक्षा के लिए ऋषि दयानंद द्वारा दिए गए योगदान को रेखांकित किया। पुनिया खाप के प्रधान शमसेर पुनिया नंबरदार ने इस आंदोलन में आर्य समाज का पूर्ण रूप से साथ देने की बात कही। सुभाष फौजी ने कहा कि वर्तमान समय की यह लड़ाई किसी तलवार की नहीं, बल्कि विचारों की लड़ाई है। इस महत्वपूर्ण बैठक में कुल मिलाकर आठ प्रस्ताव पारित किए गए।

बैठक में पारित किए गए आठ प्रमुख प्रस्ताव

इन प्रस्तावों में रामपाल दास से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की गई। साथ ही उसकी जमानत को तुरंत निरस्त कराने की मांग भी शामिल रही। धनाना धाम से जुड़ी कथित हथियार लहराने और धमकी देने की घटना में सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई। एआई और सोशल मीडिया के कथित दुरुपयोग की साइबर जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा गया। वैदिक तथा वैज्ञानिक विचारों के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया और पाखंड तथा नशे के खिलाफ एक बड़ा जनजागरण अभियान चलाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके अलावा सर्वखाप और सभी ग्राम पंचायतों से यह अपील की गई कि वे किसी भी गंभीर आपराधिक मामले के आरोपियों का किसी भी प्रकार से महिमामंडन न करें।

राजनेताओं की वीडियो के स्क्रीनशॉट रखने का निर्णय

आठवें प्रस्ताव के तहत ऐसे सभी जनप्रतिनिधियों और राजनेताओं की वीडियो के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने का बड़ा निर्णय लिया गया, जो संगठन के अनुसार हत्या और देशद्रोह के आरोपी रामपाल के डेरे में जाते हैं। बैठक में यह भी कहा गया कि सही समय आने पर आर्य समाज इस संबंध में उन लोगों से पूरा जवाब लेगा। इस विशेष अवसर पर पाखंड के खिलाफ 'गुरुडम' नाम से एक नया गीत भी आधिकारिक तौर पर जारी किया गया। यह नया गीत आर्य समाज के भजनोपदेशक रामनिवास द्वारा गाया गया है तथा इसे रामराख आर्य ने लिखा है।

प्रमुख लोग रहे मौजूद

इस संगोष्ठी और बैठक के दौरान शमसेर आर्य, जगतपाल शास्त्री, इंद्रपाल, बलबीर देशवाल, देवेंद्र सैनी, डॉ. विवेकानंद, देवेंद्र उप्पल, इंद्रजीत शास्त्री, वेद प्रकाश, देवदत्त आर्य, आचार्य कर्मबीर, सूर्यदेव वेदांशु, एडवोकेट हिमांशु खोवाल, सतप्रकाश, जयवीर सोनी, बलवंत आर्य, सत्यवान आर्य, सेठ मांगेराम और मनोज आर्य सहित विभिन्न स्थानीय तथा ग्रामीण आर्य समाजों के प्रमुख पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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