यमुनानगर: हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने जमीन अधिग्रहण के मामले में सुनाया फैसला, जमीन मालिकों को मिलेगा कलेक्टर रेट पर मुआवजा

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यमुनानगर जिले के जगाधरी में सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का 25 साल पुराने मामले में अपना फैसला सुनाकर याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को सही ठहराया है।
- जमीन मालिकों को 14 सितंबर, 2026 के कलेक्टर रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
- कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुआवजे का आकलनन दो महीने के भीतर पूरा किया जाए और भुगतान भुगतान एक महीने के भीतर हो।
- सेक्टर 18 और सेक्टर 18 पार्ट रोड के निर्माण में देरी को रोकने के लिए अधिग्रहणन को सही ठहराया गया।
- मुआवजे के साथ 12 प्रतिशत ब्याज का भुगतान भी किया जाएगा।
## जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और कोर्ट का फैसला
जस्टिस विकास बहल और जस्टिस दिव्या शर्मा की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार यह साबित करने में नाकाम रही है कि उसने जमीन अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 5-ए के तहत जमीन मालिकों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार देने से पहले जरूरी सोच-विचार किया था। कोर्ट ने पाया कि सरकार ने नियमों का पालन नहीं किया था।
इस मामले में 28 अगस्त, 2001 को जमीन अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4, 17(1) और 17(4) के तहत नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके साथ ही 30 अगस्त, 2001 के नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इन नोटिफिकेशन्स को कोर्ट में चुनौती दी थी।
## जनहित और सड़क निर्माण में देरी से बचाव
कोर्ट ने अधिग्रहण को रद्द करने से इनकार कर दिया क्योंकि इस चरण पर ऐसा करने से सेक्टर 18 और सेक्टर 18 पार्ट रोड के निर्माण में बहुत ज्यादा देरी होती। यह सड़क काफी हद तक बन चुकी थी और नेशनल हाईवे-73 से जुड़ी हुई थी।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जमा किए गए जवाब, स्टेटस रिपोर्ट या रिकॉर्ड में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जो 1894 के अधिनियम की धारा 5-ए के प्रावधानों को लागू न करने कोเหมาะสม ठहरा सके। जनहित में यह जरूरी है कि सड़क याचिकाकर्ताओं की जमीन से होकर गुजरे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिफिकेशन को रद्द करने नहीं तो आने-जाने वालों को बहुत परेशानी और दिक्कतों का सामना करना जाएगा और यह जनहित में नहीं होगा। भले ही एक वैकल्पिक रास्ता मौजूद है, लेकिन सभी यात्रियों के हित में यही होगा कि सड़क याचिकाकर्ताओं की जमीन से जमीन से होकर गुजरे ताकि उसे नेशनल हाईवे 73 से जोड़ा जा सके।
## मुआवजे का भुगतान और समय सीमा
कोर्ट ने विवादित नोटिफिकेशन को सही ठहराते हुए कहा कि जो याचिकाकर्ता 2001 से अपना केस लड़ रहे हैं और जिन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है, वे 2013 के अधिनियम के तहत मुआवजे के हकदार हैं। कोर्ट ने के लिए निर्देश दिया गया है कि फैसले की तारीख से लेकर मुआवजे के असल भुगतान तक धारा 30(3) के तहत 12 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया जाए।
प्रशासन को आदेश दिया गया है कि मुआवजे का आकलनन का काम दो महीने के भीतर पूरा करें और उसके बाद एक महीने के भीतर भुगतान कर दें।