समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की याचिका खारिज करे एचईआरसी, ईईएफआई ने की बड़ी मांग

इलेक्ट्रिसिटी एंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया (ईईएफआई) ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) से एक बड़ी मांग की है। फेडरेशन ने गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को पूरी तरह से खारिज करने की मांग उठाई है। इस संबंध में संगठन ने अपनी आपत्तियों के साथ आयोग को रिपोर्ट भेजकर याचिका रद करने की मांग की है।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कानूनी, तकनीकी और वित्तीय कमियां सामने आई हैं। चंडीगढ़ में 19 सितंबर को यह बात सामने आई है। फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सुदीप दत्ता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व सुरेश राठी ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में प्रस्तावित लाइसेंस को लेकर कानूनी, तकनीकी, वित्तीय और उपभोक्ता हितों से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आई हैं।
केवल कागजों पर प्रस्तावित नेटवर्क का मुद्दा
सुभाष लांबा ने कहा कि केवल कागजों पर प्रस्तावित नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं के आधार पर समानांतर वितरण लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित कंपनी करीब 4,716.73 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 84 प्रतिशत तीसरे से पांचवें वर्ष में खर्च करने की योजना बना रही है। गुरुग्राम शहर में निवेश को दो वर्ष तक टालने का मुद्दा भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
माइग्रेशन फ्रेमवर्क और बकाया राशि का समाधान नहीं
सुदीप दत्ता और सुरेश राठी ने कहा कि उपभोक्ताओं के एक लाइसेंसधारी से दूसरे के पास जाने के लिए राज्य में कोई अधिसूचित माइग्रेशन फ्रेमवर्क नहीं है। रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि प्रस्तावित माइग्रेशन प्रोटोकाल डीएचबीवीएन को बाध्य नहीं कर सकता है। बकाया राशि, फ्यूल सरचार्ज एडजेस्टमेंट, सुरक्षा जमा और मीटरों के हस्तांतरण जैसे अहम मुद्दों का भी इसमें कोई स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है।
राजस्व पर असर और उपभोक्ताओं पर बोझ की आशंका
सुभाष लांबा के अनुसार गुरुग्राम और नूंह डीएचबीवीएन के 42 प्रतिशत से अधिक राजस्व से जुड़े हुए हैं। अधिक राजस्व वाले उपभोक्ताओं के स्थानांतरण से डीएचबीवीएन पर ईंधन अधिभार समायोजन और दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों की स्थिर लागत का भार शेष उपभोक्ताओं पर पडऩे की पूरी आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली वितरण एक सार्वजनिक दायित्व वाली सेवा है। इसलिए उपभोक्ता हित, सार्वभौमिक सेवा दायित्व और वितरण व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।