हरियाणा में महिलाओं ने एकता और मेहनत से जूता कारोबार को बनाया आजीविका का मजबूत साधन

हरियाणा में महिलाओं ने एकता और मेहनत से जूता कारोबार को बनाया आजीविका का मजबूत साधन

नूंह जिले में ग्रामीण महिलाएं अब स्वरोजगार की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने लिए नए रास्ते बना रही हैं। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाकर ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। सामूहिक प्रयासों के बल पर ग्रामीण महिलाएं अब सफल व्यवसाय भी खड़े करने में पूरी तरह कामयाब हो रही हैं। फिरोजपुर झिरका खंड के गांव बसई मेव की चांद स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी की सफलता इस बात का एक बड़ा उदाहरण है।

एचएसआरएलएम योजना से मिल रहा है लाभ

एचएसआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक मजबूत माध्यम बन रहे हैं। महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बैंकिंग सुविधाओं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। जिला प्रशासन का लगातार यह प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका के साधनों से जोड़ा जाए। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपने परिवार और गांव के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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चांद स्वयं सहायता समूह और पिंकी की सफलता

चांद स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले पिंकी जूते की एक छोटी सी दुकान पर काम किया करती थीं। एचएसआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर जूते का कारोबार शुरू किया। मिशन के तहत इस समूह को कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड यानी सीआईएफ के रूप में 8.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी। इस राशि का उपयोग महिलाओं ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और उसका विस्तार करने के लिए किया है।

बैंक ऋण और कारोबार का बढ़ता दायरा

पिंकी ने इस संबंध में जानकारी दी कि शुरुआत में इस समूह से सात महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई थीं। इसके बाद इस समूह ने बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त करके अपने इस कारोबार को और अधिक विस्तार दिया। बैंक से दो अलग-अलग बार में कुल 4.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ था। महिलाओं की कड़ी मेहनत, आपसी सहयोग और बेहतर प्रबंधन के चलते अब इस समूह का कुल लेन-देन करीब 12 से 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

महिलाएं खुद संभाल रही हैं दुकान का कामकाज

वर्तमान समय में इस समूह की छह महिलाएं मिलकर इस जूते की दुकान का पूरी तरह से संचालन कर रही हैं। दुकान के लिए नया माल खरीदने से लेकर उसकी बिक्री करने और पूरा हिसाब-किताब रखने तक की जिम्मेदारी ये महिलाएं खुद संभालती हैं। इससे इन महिलाओं को नियमित आजीविका के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का अच्छा अवसर मिल रहा है।

महिलाओं का बढ़ा हुआ आत्मविश्वास और प्रेरणा

पिंकी ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा कि पहले उनका मुख्य उद्देश्य केवल अपनी आजीविका चलाना ही था। लेकिन एचएसआरएलएम और स्वयं सहायता समूह से मिलने वाले सहयोग के बाद उनका आत्मविश्वास काफी ज्यादा बढ़ गया है। अब वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। वे अन्य महिलाओं से स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपना खुद का स्वरोजगार अपनाने की अपील कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि समूह की महिलाओं की एकजुटता और उनके सामूहिक प्रयास इस कारोबार को आगे बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। बैंकिंग सुविधाओं और इस मिशन से मिली वित्तीय सहायता ने उनके इस व्यवसाय को और अधिक विस्तार देने में मदद की है। आज समूह की ये सभी महिलाएं खुद अपना कारोबार संभाल रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम

एचएसआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बचत, बैंक लिंकेज, ऋण और सामुदायिक निवेश जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इन तमाम सुविधाओं से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर लगातार उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। चांद स्वयं सहायता समूह की यह सफलता यह साफ बताती है कि एकजुटता, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग करके ग्रामीण महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ा सकती हैं। यह सब आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत ही मजबूत और सराहनीय कदम साबित हो रहा है।

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