हरियाणा की शहरी निकायों में गठित 1646 वार्ड समितियों के अस्तित्व पर मंडराया कानूनी और संवैधानिक संकट

हरियाणा की शहरी निकायों में गठित 1646 वार्ड समितियों के अस्तित्व पर मंडराया कानूनी और संवैधानिक संकट

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से गत दिवस शुक्रवार 25 सितम्बर को जारी एक आधिकारिक बयान अनुसार आमजन की सुविधा और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रदेश के सभी शहरी निकायों में 1646 वार्ड समितियों का गठन किया गया है। इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एडवोकेट और म्यूनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने आज बार पुन: हरियाणा के सभी 87 मुनिसिपलिटीस में गठित वार्ड कमेटियों को गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक करार देते हुए प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव, महानिदेशक और विभाग के उच्च अधिकारियों को नोटिस भेजा है।

वर्ष 2008 का कानून नगर निगमों पर लागू ही नहीं

हेमंत ने बताया कि प्रदेश की सभी 87 मुनिसिपलिटीस में वार्ड कमेटियों के गठन का आधार हरियाणा म्युनिसिपल सिटिजन्स पार्टिसिपेशन एक्ट, 2008 को बनाया है, जबकि इस कानून की धारा 2(जी) स्पष्ट रूप से म्युनिसिपेलिटी की परिभाषा केवल हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट, 1973 के अंतर्गत गठित नगर परिषदों और नगर पालिकाओं तक सीमित करती है।

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उन्होंने कहा कि हरियाणा में स्थापित सभी 11 नगर निगमों का गठन हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत हुआ है, इसलिए 2008 का अधिनियम उन पर लागू ही नहीं होता। ऐसे में उक्त कानून के आधार पर हरियाणा की सभी 11 नगर निगमों में वार्ड कमेटियों का गठन पूर्णतः अधिकारविहीन और असंवैधानिक है।

1994 के कानून में भी निगम को नहीं मिला अधिकार

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि नगर निगमों में वार्ड कमेटियों का गठन किया जाना हो, तो उसका प्रावधान हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 10 में है।

हेमंत के अनुसार इस धारा में वार्ड कमेटियों के गठन का अधिकार केवल राज्य सरकार को दिया गया है। नगर निगम महापौर, निगम सदन अथवा नगर आयुक्त को ऐसा कोई अधिकार नहीं सौंपा गया है। इसलिए नगर निगम के सदनों द्वारा स्वयं वार्ड कमेटियां गठित करना कानून के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन है।

दो-दो कानूनों का उल्लंघन

हेमंत ने दावा किया कि इस प्रकार हरियाणा के निगमों में वार्ड समितियों का गठन दो अलग-अलग कानूनी आधारों पर अवैध है। पहला, जिस वर्ष 2008 के अधिनियम का सहारा लिया गया, वह नगर निगमों पर लागू ही नहीं होता। दूसरा, 1994 के नगर निगम अधिनियम के अनुसार भी वार्ड कमेटियां गठित करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है, नगर निगम के पास नहीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी वैधानिक संस्था को वही अधिकार प्राप्त होते हैं, जो कानून स्पष्ट रूप से प्रदान करता है। कोई भी सार्वजनिक प्राधिकरण जैसे नगर निगम सदन स्वयं अपने लिए ऐसे अधिकार नहीं बना सकता जो विधानसभा ने उसे दिए ही न हों।

संवैधानिक प्रावधानों का भी मामला

जहाँ तक प्रदेश की कुल 76 नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों का विषय है, इस बारे में हेमंत ने भारत देश के संविधान के अनुच्छेद 243 (एस) का हवाला देते हुए नोटिस में लिखा है कि उसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि वार्ड समितियों का गठन केवल उन मुनिसिपलिटीस में किया जा सकता है जहाँ की जनसँख्या तीन लाख या उससे अधिक हो।

अब चूँकि हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973 के अनुसार प्रदेश में नगरपालिका समिति के लिए जनसँख्या पचास हज़ार से अधिक नहीं होती जबकि नगर परिषद के लिए आबादी की सीमा पचास हज़ार से अधिक परन्तु तीन लाख से कम होती है, इसलिए इस आधार पर हरियाणा के सभी 76 नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों में संवैधानिक तौर पर वार्ड समितियों का गठन किया ही नहीं जा सकता है।

हेमंत ने कहा कि यदि बिना कानूनी अधिकार और बगैर संवैधानिक मान्यता के गठित इन वार्ड कमेटियों को जारी रहने दिया गया तो यह वर्ष 2008 के कानून और संवैधानिक प्रवाधों का खुला उल्लंघन होगा। यही नहीं इस आधार पर वार्ड समितियों के गठन को अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है।

कानूनी संशोधन की संभावना

हालांकि हेमंत ने बताया कि अगर प्रदेश विधानसभा द्वारा हरियाणा नगर-निकाय नागरिक भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 2 (जी) में संशोधन कर उसमें स्पष्ट रूप से म्युनिसिपेलिटी की परिभाषा में हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के अंतर्गत गठित नगर निगमों को शामिल कर लिया जाता है और साथ साथ उपरोक्त हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 10 में भी संशोधन कर नगर निगमों में वार्ड समितियों के गठन का अधिकार प्रदेश सरकार की बजाय निगम सदन को दे दिया जाता है, तो हरियाणा में कम से कम 11 नगर निगमों के सदनों द्वारा गठित सभी वार्ड समितियों को वैधता प्राप्त हो सकती है।

हालांकि प्रदेश की 76 नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों में गठित वार्ड कमेटियों को प्रदेश सरकार द्वारा कोई भी कानूनी संशोधन करके मान्यता प्रदान नहीं की जा सकता है चूँकि भारत के संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि वार्ड समितियों का गठन केवल उन मुनिसिपलिटीस में किया जा सकता है जहाँ की जनसँख्या तीन लाख या उससे अधिक हो और हरियाणा में सभी नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों की आबादी तीन लाख से कम है।

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