हरियाणा में 2 HCS अधिकारियों ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, नायब सैनी के मुख्यमंत्री बनने से पहले से एक ही उपमंडल में हैं तैनात

हरियाणा में प्रशासनिक स्तर पर एक बहुत बड़ा और अनोखा मामला सामने आया है। हरियाणा में दो एच.सी.एस. अधिकारियों ने एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। यह दोनों अधिकारी नायब सैनी के मुख्यमंत्री बनने से भी पहले से आज तक एक ही उपमंडल में एस.डी.एम. पद पर तैनात हैं।
- सिरसा के राजेंद्र कुमार और अम्बाला के दर्शन कुमार ने एक ही सब-डिविजन में अपने निरंतर चार वर्ष पूरे कर लिए हैं।
- प्रदेश के अस्सी प्रशासनिक उपमंडलों में सामान्यतः एक साल के भीतर ही एस.डी.एम. की तैनाती बदल जाती है।
- दोनों ही अधिकारी सितंबर 2022 से लगातार अपने-अपने उपमंडल में पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात चले आ रहे हैं।
हरियाणा में उपमंडल अधिकारियों की तैनाती और प्रशासनिक चर्चा
चंडीगढ़ में मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में उपमंडल स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती आमतौर पर काफी कम अवधि के लिए होती है। कई मामलों में तो एक वर्ष पूरा होने से पहले ही अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है। ऐसे में वर्ष 2019 बैच के दो एच.सी.एस. अधिकारियों—राजेंद्र कुमार और दर्शन कुमार—का एक ही उपमंडल में लगातार चार वर्ष से अधिक समय तक तैनात रहना प्रशासनिक हलकों में एक बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार, जो लगातार हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था पर शोध एवं विश्लेषण करते रहते हैं, उन्होंने इस बात की पूरी जानकारी साझा की है। उनके अनुसार राजेंद्र कुमार सिरसा उपमंडल में और दर्शन कुमार अम्बाला उपमंडल में सितंबर 2022 से लगातार एसडीओ सिविल के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। व्यावहारिक रूप से इसी पद को सामान्य बोलचाल की भाषा में एसडीएम कहा जाता है। सबसे खास और ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों की वर्तमान तैनाती बारह मार्च 2024 को नायब सिंह सैनी के पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से भी काफी पहले की है। अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री के रूप में उनकी दूसरी पारी शुरू होने के बाद भी यह दोनों अधिकारी अपने-अपने उपमंडल में पूरी तरह से बने रहे।
एसडीएम नहीं बल्कि सरकारी पदनाम है एसडीओ सिविल
हेमंत कुमार के मुताबिक हरियाणा में उपमंडल स्तर पर किसी भी अधिकारी का असली सरकारी प्रशासनिक पदनाम सब-डिविज़नल ऑफिसर सिविल यानी एसडीओ सिविल होता है। आम प्रशासनिक और जनभाषा में ही इसे सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम कहा जाता है। एसडीएम शब्द का विधिक संदर्भ पहले दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में हुआ करता था। अब एक जुलाई 2024 से लागू हो चुकी नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 यानी बीएनएसएस में भी उपमंडल स्तर पर मजिस्ट्रेट संबंधी पूरी व्यवस्था का विशेष उल्लेख किया गया है।
सीधी एचसीएस भर्ती से नहीं आए थे दोनों अधिकारी
राजेंद्र कुमार और दर्शन कुमार के इतने लंबे कार्यकाल की एक और बड़ी समानता यह है कि यह दोनों सीधे एचसीएस भर्ती से सेवा में नहीं आए थे। यह दोनों वर्ष 2019 में रजिस्टर ए-वन यानी तहसीलदार या जिला राजस्व अधिकारी वर्ग से पदोन्नत होकर एचसीएस में शामिल हुए थे। सितंबर 2022 में राजेंद्र कुमार को सिरसा में एसडीओ सिविल के पद पर नियुक्त किया गया था। वे इसके साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण यानी एचएसवीपी के एस्टेट ऑफिसर सिरसा की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से संभाल रहे हैं। दूसरी तरफ दर्शन कुमार को सितंबर 2022 में अम्बाला में एसडीओ सिविल के पद पर लगाया गया था। वे भी समय-समय पर एचएसवीपी एस्टेट ऑफिसर अम्बाला का अतिरिक्त कार्यभार संभाल चुके हैं। हालांकि वर्तमान में यह अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके पास नहीं है। जुलाई 2026 में राज्य सरकार ने उन्हें अम्बाला में प्रस्तावित आईएमटी से संबंधित भूमि अधिग्रहण और प्रबंधन का नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है।
अम्बाला के एसडीएम दर्शन कुमार ने ढाई साल में निभाए चार चुनाव
दर्शन कुमार की अम्बाला में लंबी तैनाती के दौरान उनकी चुनावी जिम्मेदारियां भी विशेष रूप से बेहद उल्लेखनीय रही हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार अप्रैल 2024 से सितंबर 2025 के बीच हुए कुल चार अलग-अलग चुनावों में उन्होंने निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
लोकसभा चुनाव 2024 में एआरओ की भूमिका
अप्रैल और मई 2024 के दौरान हुए अठारहवीं लोकसभा चुनाव में दर्शन कुमार ने अम्बाला संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अम्बाला शहर विधानसभा क्षेत्र में सहायक रिटर्निंग ऑफिसर यानी एआरओ की बड़ी जिम्मेदारी निभाई थी।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में आरओ बने
सितंबर और अक्टूबर 2024 के दौरान संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें अम्बाला शहर विधानसभा क्षेत्र संख्या पांच का रिटर्निंग ऑफिसर यानी आरओ नियुक्त किया गया था।
नगर निगम मेयर उपचुनाव 2025 और जिला परिषद चुनाव
फरवरी और मार्च 2025 के दौरान हुए अम्बाला नगर निगम मेयर उपचुनाव में भी दर्शन कुमार ने रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। चुनाव का पूरा परिणाम आने के बाद विजयी प्रत्याशी शैलजा सचदेवा को निर्वाचन प्रमाणपत्र भी उनके ही अपने हस्ताक्षर से प्रदान किया गया था। इसके बाद सितंबर 2025 में अम्बाला जिला परिषद अध्यक्ष की रिक्त सीट के लिए जब चुनाव हुआ, तब भी उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर की बहुत अहम भूमिका निभाई थी। इस तरह से देखा जाए तो करीब डेढ़ वर्ष की अवधि में उनके खाते में एक लोकसभा चुनाव में एआरओ तथा विधानसभा, नगर निगम मेयर उपचुनाव और जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव में आरओ की बड़ी जिम्मेदारी रही।
वर्ष 2026 के नगर निगम चुनाव में क्यों बदली जिम्मेदारी
अप्रैल और मई 2026 में अम्बाला नगर निगम के मेयर और सभी बीस वार्डों के आम चुनाव के दौरान दर्शन कुमार को इस बार रिटर्निंग ऑफिसर नहीं बनाया गया था। हेमंत कुमार के अनुसार उन्होंने उस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष इस संबंध में अपना प्रतिनिधित्व भी दर्ज कराया था। उनके मुताबिक लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों को किसी भी प्रकार की चुनावी ड्यूटी से अलग रखने संबंधी निर्वाचन व्यवस्था के संदर्भ में इस बार दर्शन कुमार के स्थान पर तत्कालीन एडीसी विराट, जो कि एचसीएस अधिकारी हैं, को रिटर्निंग ऑफिसर की नई जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। यह पूरा पहलू इसलिए भी बहुत चर्चा में रहा क्योंकि इससे पहले अम्बाला में हुए कई चुनावों में दर्शन कुमार ही लगातार निर्वाचन अधिकारी की भूमिका बखूबी निभाते आ रहे थे।
प्रशासनिक इतिहास और परंपराओं का बदलता स्वरूप
हेमंत कुमार के अनुसार कुछ दशक पहले तक हरियाणा के महत्वपूर्ण उपमंडलों में एचसीएस अधिकारियों का दो से तीन वर्ष तक एसडीओ सिविल या एसडीएम के रूप में रहना अपेक्षाकृत पूरी तरह से सामान्य बात हुआ करती थी। हालांकि हाल के वर्षों में प्रशासनिक अधिकारियों की कुल संख्या में बढ़ोतरी होने और प्रशासनिक पुनर्रचना की तेज गति के बीच अब लंबे समय तक एक ही उपमंडल में तैनाती बेहद कम ही दिखाई देती है। सीधी भर्ती से आने वाले आईएएस अधिकारियों को भी अपने प्रशिक्षण और फील्ड अनुभव के दौरान एसडीएम या एसडीओ सिविल स्तर की जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, लेकिन उनकी फील्ड पोस्टिंग आमतौर पर एक सीमित अवधि के लिए ही होती है। अम्बाला के वर्तमान उपायुक्त सचिन गुप्ता, आईएएस भी अगस्त 2020 से जुलाई 2021 तक अम्बाला में एसडीएम के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
एक ही उपमंडल में चार साल रहना संयोग है या प्रशासनिक परंपरा
सिरसा के राजेंद्र कुमार और अम्बाला के दर्शन कुमार की लगातार चार वर्ष की यह लंबी तैनाती ने हरियाणा की एसडीओ सिविल और एसडीएम पोस्टिंग व्यवस्था, स्थानांतरण नीति तथा प्रशासनिक निरंतरता को लेकर एक बहुत ही दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। एक तरफ इतने लंबे कार्यकाल से किसी भी अधिकारी को उस क्षेत्र की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था, स्थानीय संस्थाओं और चुनावी तंत्र का बहुत गहरा अनुभव प्राप्त हो जाता है। दूसरी तरफ इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर लगातार तैनाती को लेकर स्थानांतरण एवं चुनाव संबंधी सामान्य प्रशासनिक मानकों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। सितंबर 2026 में अपने पूरे चार वर्ष पूरे करने वाले इन दोनों एचसीएस अधिकारियों की तैनाती इसलिए भी सबसे अधिक उल्लेखनीय है क्योंकि इनका यह पूरा कार्यकाल मौजूदा मुख्यमंत्री के कार्यकाल शुरू होने से भी काफी पहले आरंभ हुआ था और अब तक लगातार जारी है।