हरियाणा में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती, 2295 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार

हरियाणा में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती, 2295 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार

हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में सिंचाई, सडक़ों, पेयजल आपूर्ति तथा भंडारण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,295.27 करोड़ रुपये की ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन सभी प्रस्तावों में से 2,180.50 करोड़ रुपये की ऋण सहायता नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष यानी आरआईडीएफ के तहत प्रस्तावित की गई है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक

हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक के दौरान उन्होंने राज्य में नाबार्ड की सहायता से चल रही सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए। साथ ही, संबंधित विभागों द्वारा ऋण निकासी के दावे समय पर प्रस्तुत करने पर विशेष जोर दिया गया ताकि काम में कोई रुकावट न आए। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली छह प्रमुख परियोजनाओं में सिंचाई, पेयजल, सडक़ और वेयरहाउसिंग बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश प्रस्तावित किया गया है।

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सिंचाई और सडक़ परियोजनाओं का विवरण

नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी ने बैठक में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए प्रस्तावों में 315.36 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली सिंचाई परियोजना शामिल है। इस सिंचाई परियोजना के लिए 299.59 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा, सडक़ों के सुधार, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से जुड़ी कुल 57 परियोजनाएं हैं। इन सभी सडक़ परियोजनाओं की कुल लागत 495.71 करोड़ रुपये है। इन सडक़ कार्यों के लिए 470.92 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित की गई है। अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों प्रस्ताव आरआईडीएफ पोर्टल पर पहले ही सफलतापूप्र्वक प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

ग्रामीण पेयजल परियोजना और महाग्राम

नूंह और पलवल जिलों के पांच महाग्रामों को कवर करने के लिए एक बड़ी ग्रामीण पेयजल परियोजना तैयार की गई है। इन महाग्रामों में बिछोर, बिसरू, नई, सिंगार और पिंगवां शामिल हैं। इस बड़ी पेयजल परियोजना की कुल लागत 744.59 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें से 707.36 करोड़ रुपये की भारी-भरकम आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित की गई है। इस परियोजना के तहत यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रैनी वैल तथा संबंधित बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। ऐसा करने से जल स्रोतों की क्षमता को और अधिक बढ़ाने की योजना पर काम होगा। आरआईडीएफ के तहत अपेक्षित मानक आवंटन को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इसके प्रथम चरण के लिए 299 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता संबंधी प्रस्ताव को हरियाणा वित्त विभाग द्वारा जल्द ही स्वीकृति दी जानी है।

भंडारण क्षमता और गोदामों का निर्माण

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत हरियाणा राज्य भंडारण निगम यानी एचएसडब्ल्यूसी के पास उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग किया जाएगा। इस खाली भूमि पर 2,30,508 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाले नए गोदामों के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अलावा, निचले क्षेत्रों में स्थित परिसरों में 1,23,664 मीट्रिक टन गोदाम क्षमता के पुनर्निर्माण के लिए भी योजना बनाई गई है। इन सभी कार्यों के लिए कुल 290.74 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इसमें से 276.20 करोड़ रुपये का ऋण घटक प्रस्तावित किया गया है। हरियाणा के वित्त विभाग ने इस परियोजना को नाबार्ड की अवसंरचना विकास सहायता यानी एनआईडीए योजना के तहत वित्तपोषण के लिए विचार किए जाने की अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

सोनीपत के गन्नौर हॉर्टिकल्चर मार्केट की समीक्षा

मुख्य सचिव ने सोनीपत के गन्नौर स्थित इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट यानी आईआईएचएम की प्रगति की भी गहरी समीक्षा की। इस विशेष परियोजना के लिए नाबार्ड ने एनआईडीए के तहत 1,850 करोड़ रुपये का सावधि ऋण स्वीकृत किया हुआ है। परियोजना का वित्तीय चरणबद्ध क्रियान्वयन वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक यानी कुल तीन वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है। वर्ष 2025-26 में 740 करोड़ रुपये के निर्धारित चरण के मुकाबले केवल 451 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। इसके कारण 289 करोड़ रुपये का वितरण अंतर साफ तौर पर सामने आया है। वर्ष 2026-27 के लिए चरणबद्ध वितरण की राशि 740 करोड़ रुपये तय की गई है। एचआईएचएमसीएल को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे परियोजना की भौतिक प्रगति के अनुरूप ही अपने ऋण निकासी के दावे प्रस्तुत करें। ऐसा करने से इस महत्वपूर्ण परियोजना को तय की गई समय-सीमा के भीतर ही पूरा किया जा सकेगा।

विभिन्न विभागों की आरआईडीएफ परियोजनाएं

बैठक के दौरान राज्य के विभिन्न विभागों के अंतर्गत वर्तमान में चल रही आरआईडीएफ परियोजनाओं की प्रगति का भी जायजा लिया गया। वित्तीय चरणबद्धता के नियमों के अनुसार 17 अगस्त, 2026 तक आरआईडीएफ की 28वीं से 31वीं किस्त के तहत चल रही परियोजनाओं की जानकारी दी गई। इन सभी चालू परियोजनाओं में कुल 962.81 करोड़ रुपये के वितरण अंतर की बात सामने आई है। सरकार इन सभी अंतरों को समय पर भरने के लिए लगातार प्रयास कर रही है ताकि जनता को विकास कार्यों का पूरा लाभ समय पर मिल सके।

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