हरियाणा सूचना आयोग पर RTI कार्यकर्ता पीपी कपूर के गंभीर आरोप

हरियाणा राज्य सूचना आयोग पर आरटीआई कानून को कमजोर करने और पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने एक पोस्टर जारी कर आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं और जल्द ही बड़ा खुलासा करने की चेतावनी दी है।
चंडीगढ़ /23 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा राज्य सूचना आयोग पर RTI कानून को कमजोर करने का आरोप
हरियाणा राज्य सूचना आयोग (Haryana State Information Commission) एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने आयोग की कार्यप्रणाली और सूचना आयुक्तों की भूमिका पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 'हरियाणा स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन के हाथ RTI Act के खून से रंगे हैं' लिखा हुआ एक पोस्टर जारी करते हुए कहा कि राज्य में सूचना के अधिकार को पूरी तरह खत्म किया जा रहा है।
पीपी कपूर का कहना है कि आयोग के आयुक्तों को राज्य सरकार की ओर से भारी-भरकम वेतन, गाड़ियां, नौकर-चाकर और तमाम तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। इसके बावजूद वे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभा रहे हैं। जिस पारदर्शिता और जवाबदेही को तय करने के लिए इस आयोग का गठन किया गया था, वह अब पूरी तरह गायब हो चुकी है।
पद और सरकारी सुविधाओं पर उठाए सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता ने आयोग के सदस्यों को उनके पद की मर्यादा याद दिलाते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से लाखों रुपये का वेतन और भत्ते लेने के बाद भी आम जनता को सही समय पर सूचना नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग सूचना छिपाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय RTI कानून का ही गला घोंटने में लगा हुआ है।
इस रवैये के कारण आम नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। कार्यकर्ता का मानना है कि पारदर्शी शासन व्यवस्था के लिए RTI कानून एक सबसे बड़ा हथियार था, लेकिन अब आयोग की ढिलाई और लापरवाही के कारण नागरिकों के इस अधिकार का हनन हो रहा है।
जल्द सिलसिलेवार भंडाफोड़ करने की चेतावनी
पीपी कपूर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हरियाणा के जागरूक नागरिक और आरटीआई कार्यकर्ता इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आयोग में चल रही गड़बड़ियों और कारगुजारियों का जल्द ही सिलसिलेवार तरीके से भंडाफोड़ किया जाएगा।
इस बयान के बाद प्रशासनिक गलियारों और राज्य सरकार के हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों और आरोपों पर राज्य सूचना आयोग या सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।