हरियाणा में एमएसएमई के लिए राइट टू बिजनेस एक्ट लागू, कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया हुई समयबद्ध

हरियाणा में एमएसएमई के लिए कारोबार शुरू करने और मौजूदा विनिर्माण इकाइयों का विस्तार करने की प्रक्रिया अब पूरी तरह से समयबद्ध हो गई है। हरियाणा सरकार ने हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026 लागू कर दिया है, जिससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस संदर्भ में राज्य सरकार की तरफ से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। जिला स्तर पर आवेदन करने के बाद उस पर 15 कार्यदिवस के भीतर फैसला करना जरूरी किया गया है।
आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा
यदि इस तय अवधि के भीतर जिला स्तर पर मंजूरी या फिर अस्वीकृति नहीं मिलती है, तो वह आवेदन अपने आप ही स्वतः राज्य स्तर पर चला जाएगा। राज्य स्तर पर भी 10 कार्यदिवस के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा। यदि वहां भी 10 दिन के भीतर कोई फैसला नहीं होता है, तो इन-प्रिंसिपल अप्रूवल को स्वत: ही मंजूर मान लिया जाएगा। इस तरह से सामान्य स्थिति में किसी भी आवेदन पर अधिकतम 25 कार्यदिवस के भीतर फैसला होना तय किया गया है। डीम्ड अप्रूवल की स्थिति में जिला नोडल एजेंसी को केवल तीन दिन के भीतर ही प्रमाणपत्र जारी करना होगा।
हर कारोबार को नहीं मिलेगा इस नई सुविधा का लाभ
यह महत्वपूर्ण सुविधा हर एक कारोबार को बिल्कुल नहीं मिलने वाली है। इसका सीधा लाभ केवल उन पंजीकृत एमएसएमई को ही मिलेगा जो या तो नई विनिर्माण इकाई स्थापित करना चाहते हैं या फिर अपनी मौजूदा विनिर्माण इकाई का विस्तार करना चाहते हैं। इसके लिए यह भी अनिवार्य है कि इकाई केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल पर पूरी तरह से पंजीकृत होनी चाहिए। उद्यमी को सबसे पहले जिला नोडल एजेंसी के पास जाकर ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट’ देना होगा, और इसके बाद ही आगे की आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला और राज्य स्तर पर फैसले के चरण
जिला नोडल एजेंसी को 15 कार्यदिवस के भीतर ही इन-प्रिंसिपल अप्रूवल जारी करना होगा या फिर आवेदन को खारिज करना होगा। यदि 15 दिन के अंदर कोई फैसला नहीं होता है तो दूसरा पड़ाव राज्य स्तर का होता है, जहां आवेदन हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास पहुंच जाता है। वहां पर 10 कार्यदिवस के भीतर फैसला करना होता है। यदि यहां भी 10 दिन बीत जाने के बाद कोई फैसला नहीं होता है, तो तीसरा रास्ता यानी डीम्ड अप्रूवल का खुल जाता है, जिसके बाद आवेदन मंजूर माना जाता है और जिला नोडल एजेंसी तीन दिन के अंदर प्रमाणपत्र जारी करती है।
मोराटोरियम अवधि और निरीक्षण के नियम
इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलने के बाद एमएसएमई को पूरे 36 महीने यानी कि तीन साल की एक मोराटोरियम अवधि मिलती है। इस दौरान इकाई का सामान्य निरीक्षण नहीं किया जा सकेगा और न ही किसी सामान्य आधार पर कोई जबरन कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि इन तीन वर्षों के दौरान सरकार किसी भी स्थिति में जांच नहीं कर सकेगी। यदि किसी भी इकाई के खिलाफ कोई शिकायत मिलती है, तो ऐसी स्थिति में निरीक्षण किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरण के प्रमुख को निरीक्षण का कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा और यह निरीक्षण संयुक्त निदेशक या उससे ऊपर के अधिकारी से ही कराया जाएगा, जिसकी पूर्व सूचना जिला नोडल एजेंसी के अध्यक्ष को देनी होगी।