टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं बल्कि आधार बढ़ाकर मजबूत होगी हरियाणा की राजस्व व्यवस्था : मुख्यमंत्री नायब सैनी

टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं बल्कि आधार बढ़ाकर मजबूत होगी हरियाणा की राजस्व व्यवस्था : मुख्यमंत्री नायब सैनी

चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक कार्यक्रम में कहा है कि हरियाणा की राजस्व व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य करों की दर बढ़ाकर पूरा नहीं किया जाएगा। कर आधार का विस्तार करके और बेहतर अनुपालन से इसे मजबूत किया जाएगा। राजस्व हानि पर रोक लगाकर और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से इसे हासिल किया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया
  • हरियाणा का एसजीएसटी संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हुआ
  • वर्ष 2030 तक कर-राजस्व को जीएसडीपी के 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य

राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को विकसित हरियाणा 2047 के लिए 'हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था' के विश्लेषण और मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) द्वारा आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन शामिल हुए। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता भी इस सम्मेलन में मौजूद रहे। नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ भी इस सम्मेलन में शामिल हुए।

एसजीएसटी संग्रह में भारी वृद्धि

मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में यह वृद्धि हुई है। यह अवधि अप्रैल से अगस्त तक की है। इस दौरान हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर यानी एसजीएसटी संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संग्रह 19,174 करोड़ रुपये था। अगस्त 2026 में भी हरियाणा के एसजीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके मुकाबले राष्ट्रीय औसत वृद्धि केवल 13 प्रतिशत ही रही है।

जीएसटी संग्रह में राज्य का योगदान

उन्होंने आगे कहा कि देश के कुल जीएसटी करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है। इसके बावजूद देश के कुल जीएसटी संग्रह में राज्य का योगदान लगभग 7.7 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुरुग्राम में आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सेवाओं का भी विस्तार हो रहा है।

पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टर की भूमिका

मुख्यमंत्री ने राज्य के पारंपरिक उद्योगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग राज्य की ताकत है। अंबाला का वैज्ञानिक उपकरण उद्योग भी बहुत महत्वपूर्ण है। हिसार का स्टील उद्योग और यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग भी इसमें शामिल है। इसके अलावा रोहतक का नट-बोल्ट और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग भी इसमें शामिल हैं। ये पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टर राज्य की आर्थिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण आधार हैं। हर नया उद्योग, निवेश और उद्यम रोजगार के नए अवसर पैदा करता है। इसके साथ ही यह नए राजस्व आधार की संभावनाएं भी पैदा करता है।

राजस्व बढ़ाने का भविष्य का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता की तुलना में हरियाणा का अपना कर-राजस्व अभी जीएसडीपी के 7 प्रतिशत से कम है। इसे वर्ष 2030 तक 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद इसे वर्ष 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य करों की दरें बढ़ाकर बिल्कुल हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा राजस्व व्यवस्था की दक्षता बढ़ाई जाएगी। इसकी कवरेज और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। कर आधार का विस्तार करने और नियमों के पालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। राजस्व की हानि रोकने पर भी पूरा जोर दिया जाएगा। उन्होंने अंत में कहा कि दर नहीं, आधार बढ़ाना है और बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है।

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