हरियाणा में प्राथमिक शिक्षकों का स्टेट कैडर बनाने की उठी मांग, सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की मांग

हरियाणा में प्राथमिक शिक्षकों का स्टेट कैडर बनाने की उठी मांग, सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की मांग

चंडीगढ़ में डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने हरियाणा के सरकारी प्राथमिक स्कूलों को लेकर एक बड़ी मांग उठाई है। एसोसिएशन का कहना है कि राज्य के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में कहीं शिक्षकों की कमी है और कहीं जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं। इस स्थिति का मुख्य कारण जिलावार कैडर व्यवस्था को बताया गया है। इसी समस्या के समाधान के लिए पीआरटी-जेबीटी को स्टेट कैडर में शामिल करने की मांग की गई है।

अंतर-जिला समायोजन की मांग

डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर्स एसोसिएशन हरियाणा के जिला प्रधान अशोक जैन ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षक जिला कैडर तक सीमित हैं। इसके चलते एक जिले में शिक्षक सरप्लस होने के बावजूद दूसरे जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े रहते हैं। उन्होंने साफ किया कि इस स्थिति का समाधान शिक्षकों के आवश्यकता के अनुसार अंतर-जिला समायोजन से किया जा सकता है।

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जिलों के आंकड़े और रिक्त पद

विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए अशोक जैन ने विभिन्न जिलों की स्थिति सबके सामने रखी है। आंकड़ों के अनुसार पलवल में 1,017 और यमुनानगर में 827 पद रिक्त बताए गए हैं। इसके अलावा गुरुग्राम में 656, फरीदाबाद में 579, अंबाला में 550 और सिरसा में 474 पद रिक्त बताए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ महेंद्रगढ़ में 250, रेवाड़ी में 225 और चरखी दादरी में 149 शिक्षक सरप्लस बताए जा रहे हैं।

असंतुलित वितरण और समाधान

अशोक जैन ने बताया कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि प्रदेश में शिक्षकों की कुल उपलब्धता तो है। लेकिन उनका जिलेवार वितरण संतुलित नहीं है। ऐसे में सरप्लस जिलों के शिक्षकों को रिक्त पदों वाले जिलों में भेजने की व्यवस्था किए जाने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

पारदर्शी ऑनलाइन ट्रांसफर और विद्यार्थियों को लाभ

अशोक जैन ने यह भी कहा कि यदि पीआरटी-जेबीटी का स्टेट कैडर बनाया जाता है तो एक बड़ा बदलाव आएगा। इससे रिक्त पदों और विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर पारदर्शी ऑनलाइन अंतर-जिला स्थानांतरण की व्यवस्था की जा सकती है। इससे किसी जिले में शिक्षकों की अधिकता और दूसरे जिले में कमी की स्थिति को संतुलित किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। विशेषकर ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।

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