हरियाणा में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध: 5500 नर्सिंग ऑफिसर्स ने काले बिल्ले लगाकर शुरू किया आंदोलन

हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने के विरोध में प्रदेश भर के नर्सिंग कैडर ने बुधवार से अपना बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में आंदोलन के तहत नर्सिंग ऑफिसर्स ने काले बिल्ले लगाकर अपनी ड्यूटी शुरू की है। यह विरोध प्रदर्शन नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले शुरू किया गया है। एसोसिएशन ने अपनी चेतावनी में स्पष्ट किया है कि अगर सरकार ने यह पॉलिसी वापस नहीं ली तो इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
आंदोलन के चरण और कार्यक्रम
एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, आंदोलन के पहले चरण में 30 सितंबर और एक अक्टूबर को प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में नर्सिंग स्टाफ काले बिल्ले लगाकर काम करेगा। इसके बाद आंदोलन के दूसरे चरण में आगामी 5, 6 और 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। हरियाणा में जिला अस्पतालों के साथ पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर कुल 70 स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं। इन सभी संस्थानों में कुल 5500 महिला और पुरुष नर्सिंग ऑफिसर्स कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी पर एसोसिएशन के तर्क
एसोसिएशन की अध्यक्ष विनीता बांगड़ के अनुसार, पूरे भारत में किसी भी अन्य राज्य में नर्सिंग कैडर पर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं की गई है। शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में महिलाएं केवल दिन के समय ही ड्यूटी करती हैं, जबकि नर्सिंग स्टाफ को 24 घंटे और तीन अलग-अलग शिफ्ट यानी मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट में अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है। नर्सिंग ही एकमात्र ऐसा कैडर है जो अस्पताल के अंदर 24 घंटे लगातार मौजूद रहकर मरीजों की सेवा का कार्य करता है। स्वास्थ्य विभाग के इस नर्सिंग कैडर में लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं हैं जिन पर अपने बुजुर्ग माता-पिता, बच्चों की परवरिश, शिक्षा और घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी होती है। यदि इन महिला कर्मचारियों का ट्रांसफर उनके परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर किया जाता है, तो वे लगातार भारी मानसिक तनाव में रहेंगी। इस मानसिक तनाव का सीधा और बुरा असर उनकी ड्यूटी और अस्पताल में आने वाले मरीजों की देखभाल पर पड़ेगा।
सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की चिंता
एसोसिएशन ने यह भी बहुत बड़ा तर्क दिया है कि हरियाणा के कई स्वास्थ्य संस्थान गांवों और कस्बों से बाहर बिल्कुल सुनसान इलाकों में बने हुए हैं। रात की शिफ्ट के समय उन सुनसान इलाकों तक पहुंचना महिला स्टाफ के लिए बेहद कठिन और साथ ही पूरी तरह से असुरक्षित होता है। सरकार को हमेशा महिलाओं की सुरक्षा को सबसे सर्वोपरि रखना चाहिए, लेकिन यह नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है। नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा है कि सरकार की सभी स्वास्थ्य योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में नर्सिंग स्टाफ की सबसे अहम और मुख्य भूमिका होती है। कोरोना काल के मुश्किल समय में भी नर्सिंग स्टाफ ने अपनी जान को जोखिम में डालकर मरीजों की लगातार सेवा की थी। ऐसे में सरकार को ऐसी कोई भी पॉलिसी नहीं लानी चाहिए जो उनके हितों के खिलाफ हो। एसोसिएशन ने मांग की है कि इस ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। यदि सरकार ने उनकी यह मांग नहीं मानी तो प्रदेश भर में इस आंदोलन को और भी ज्यादा तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केवल सरकार की होगी।