हरियाणा के राजकीय स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर की नियुक्ति पर रोक

हरियाणा के राजकीय स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर की नियुक्ति पर रोक

मौलिक शिक्षा निदेशालय ने हरियाणा के राजकीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना को लेकर नए आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत प्रदेश के स्कूलों में दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर की नियुक्ति नहीं होगी। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। चंडीगढ़ से 26 सितंबर को प्राप्त जानकारी के अनुसार यह आदेश सुरक्षा और कार्यक्षमता को ध्यान में रखकर दिए गए हैं।

मिड-डे मील कार्य की प्रकृति और सुरक्षा कारण

जारी निर्देशों में मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि राजकीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को भोजन वितरित किया जाता है। कुक-कम-हेल्पर का यह कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना आवश्यक होता है। इस कार्य में भोजन तैयार करने से लेकर उसे विद्यार्थियों के बीच वितरित करने तक की पूरी जिम्मेदारी शामिल होती है।

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कुक-कम-हेल्पर का कार्य शारीरिक श्रम तथा गर्म बर्तनों के समीप रहकर भोजन पकाने और बच्चों को वितरित करने से संबंधित है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सुरक्षा और कार्यक्षमता का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर के लिए इस कार्य को करना संभव नहीं है। इसी आधार पर निदेशालय ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मिड-डे मील योजना के तहत विद्यालयों में किसी भी दिव्यांग कुक-कम-हेल्पर की नियुक्ति न की जाए। निदेशालय की ओर से जिला मौलिक अधिकारियों को इन निर्देशों की अनुपालना सख्ती से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

एसीपी मामलों के निपटान और रिकॉर्ड से जुड़े निर्देश

हरियाणा मौलिक शिक्षा निदेशालय ने अंतर-जिला उदाहरण के आधार पर स्टेपिंग अप का लाभ लेने वाले कर्मचारियों के एसीपी मामलों के निपटान की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। निदेशालय ने ऐसे कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के लिए राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। निदेशक मौलिक शिक्षा की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि जिन कर्मचारियों ने अंतर-जिला उदाहरण के आधार पर स्टेपिंग अप का लाभ लिया है और जिनके ऑनलाइन एसीपी मामले स्वीकृति के लिए निदेशालय में भेजे गए हैं, उनके मामलों के निपटान के लिए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाएं।

सभी आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट आगामी सात दिनों के भीतर निदेशालय में उपलब्ध करवानी होंगी। निदेशालय ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिकॉर्ड भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि लंबित ऑनलाइन एसीपी मामलों की जांच कर उनका समय पर निपटान किया जा सके।

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