हरियाणा के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत, एचईआरसी ने 1134.54 करोड़ रुपये की एफएसए वसूली याचिका की खारिज

हरियाणा के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हरियाणा बिजली आयोग द्वारा बिजली निगमों की 1134.54 करोड़ रुपये की एफएसए वसूली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने इस फैसले को प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला बताया है। उन्होंने कहा है कि निगमों की देरी और प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ आम उपभोक्ताओं पर बिल्कुल नहीं डाला जा सकता है।
प्रो. संपत सिंह ने आयोग के सामने जताया था कड़ा विरोध
प्रो. सम्पत सिंह ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के सामने 1134.54 करोड़ रुपये की निगमों की इस याचिका पर अपना कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने सुनवाई के दौरान तथ्यों के साथ आयोग के सामने इसका पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि बिजली कंपनियां कानून और निर्धारित समय-सीमा की अनदेखी करके उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकती हैं। आज उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि आयोग ने उनकी सभी दलीलों को मान लिया है। आयोग ने 1134.54 करोड़ रुपये की वसूली की याचिका को रद्द कर दिया है।
नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा नवंबर 2025 की एफएसए राशि की वसूली का पूरा प्रयास किया गया था। यह निर्धारित राशि तय समय में बिजली बिलों में नहीं जोड़ी गई थी, जिसके कारण जनवरी 2026 में यह राशि नियमों के अनुसार जब्त हो गई थी। इसके बावजूद भी बिजली निगमों द्वारा इस राशि की लगातार वसूली का प्रयास किया जा रहा था। आयोग द्वारा इस राशि की दोबारा वसूली की अनुमति नहीं देना उपभोक्ताओं के हित में एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है। इसलिए अब बिजली वितरण कंपनियों को हर हाल में निर्धारित नियमों और समय-सीमा का पालन करना ही होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निगमों की देरी या प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए और उपभोक्ता बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली की कमियों की कीमत क्यों चुकाएं।
भविष्य में भी जनता के हितों के लिए जारी रहेगा कड़ा संघर्ष
प्रो. संपत सिंह ने यह भी कहा है कि अभी कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर सरकार और बिजली निगमों को जवाब देना अभी बाकी है। वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फयूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ आज तक नहीं दिया गया है। उनका यह जनहित का कड़ा संघर्ष वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित वार्षिक राजस्व प्राप्तियों पर होने वाली आगामी सुनवाई में भी पूरी तरह से जारी रहेगा। वे निगमों के पिछले दरवाजे से एंट्री के इस प्रयास को हर हाल में मजबूती से रोकेंगे। फिक्स्ड चार्ज, लगातार बढ़ते बिजली शुल्क और नगर निकायों के भारी टैक्स से घरों तथा छोटे कारोबारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए वे आगामी वर्ष की सुनवाई में इन मुद्दों को और भी गंभीरता से उठाएंगे। वे हरियाणा सरकार को इस पूरे मामले की समीक्षा करने के लिए मजबूर करके ही रहेंगे।