सोनीपत: हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में मिला प्रथम पुरस्कार

सोनीपत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा है कि शाहाबाद, करनाल और पानीपत की सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिलना हरियाणा राज्य के लिए बहुत गौरव की बात है। उन्होंने इस बड़ी उपलब्धि को किसानों, मिल कर्मचारियों, इंजीनियरों और प्रबंधन की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया है।
नई दिल्ली में हुआ सम्मान समारोह
डॉ. शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। यह आयोजन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज की ओर से राष्ट्रीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा सम्मेलन, उद्योग प्रदर्शनी और नवाचार प्रदर्शनी के रूप में किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में ये सभी पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।
किन-किन मिलों को मिला प्रथम पुरस्कार
मंत्री ने बताया कि पेराई सत्र 2024-25 के दौरान शाहाबाद सहकारी चीनी मिल को अन्य रिकवरी क्षेत्र में तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके अलावा, करनाल सहकारी चीनी मिल ने तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास के क्षेत्र में प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरी ओर, पानीपत के डाहर स्थित सहकारी चीनी मिल को तकनीकी दक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
पानीपत चीनी मिल का शानदार प्रदर्शन
डॉ. शर्मा के अनुसार, पानीपत सहकारी चीनी मिल ने पेराई सत्र 2025-26 के दौरान 94.61 प्रतिशत क्षमता का उपयोग किया है। इस मिल ने कुल 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 5.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। इसके साथ ही, मिल को बिजली उत्पादन से करीब 29 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। आपको बता दें कि प्रदेश की 11 सरकारी चीनी मिलों में पानीपत मिल की गन्ना पेराई सबसे अधिक रही है।
जैव-ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं मिलें
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक ही सीमित नहीं रखना चाहती है। इन सभी मिलों को बहुउत्पादक जैव-ऊर्जा केंद्र के रूप में तेजी से विकसित किया जा रहा है। चीनी के साथ-साथ एथेनॉल, बिजली, शीरा, बैगास, प्रेसमड और जैव-सीबीजी उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 690 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता की एथेनॉल परियोजनाओं पर लगभग 1200 करोड़ रुपये के निवेश की दिशा में काम चल रहा है। इसके अलावा, पानीपत में 90 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता की परियोजना के लिए करीब 200 करोड़ रुपये निवेश की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।
कुल उत्पादन और राजस्व की जानकारी
मंत्री ने अंत में बताया कि हरियाणा शुगरफेड से जुड़ी सहकारी चीनी मिलों ने कुल 285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके करीब 26.24 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। सह-उत्पादन के माध्यम से करीब 12.20 करोड़ इकाई बिजली ग्रिड को दी गई है, जिससे राज्य को लगभग 76.60 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। उन्होंने अंत में कहा कि तकनीक, बेहतर प्रबंधन और विविध उत्पादों के जरिए मिलों को मजबूत करने का मुख्य लक्ष्य है, ताकि इसका सीधा लाभ गन्ना उत्पादक किसानों को मिल सके।