जो तकनीक किसानों की लागत घटाए और आय बढ़ाए, वही असली इनोवेशन है: हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़ और कुरुक्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाडवा में कहा है कि जो तकनीक किसानों की इनपुट लागत को कम करती है, मैनुअल लेबर की जरूरत को घटाती है और फसलों से रिटर्न बढ़ाती है, वही किसानों के लिए असली इनोवेशन है। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक की सच्ची सफलता किसान के अकाउंट बुक में दिखाई देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक किसानों के लिए तभी उपयोगी है जब वह किफायती हो, इस्तेमाल करने में आसान हो और गांवों में या उसके आसपास स्थानीय स्तर पर उसकी मरम्मत की जा सके।
मुख्यमंत्री कुरुक्षेत्र के लाडवा में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित पांचवें 'इनोवेटिव फार्मर्स मीट' के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कृषि मशीनरी की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, उसका अवलोकन किया और प्रगतिशील किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इनोवेटिव फार्मर्स मीट की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि चर्चाएं बड़े शहरों या कॉन्फ्रेंस हॉल तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्हें सीधे किसानों तक ले जाया जा रहा था।
खेती के सामने चुनौतियां और समाधान
एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कृषि को मौसम की अनिश्चितताओं, पानी की बढ़ती कमी और बिगड़ती मिट्टी के स्वास्थ्य जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, ऐसी खेती की प्रथाओं की ओर बढ़ने की आवश्यकता है जो बदलती परिस्थितियों का सामना कर सकें और साथ ही किसानों की आय बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में धान और गेहूं की खेती का विशेष महत्व है। धान की सीधी बुआई (DSR), फसल-विशेष सूक्ष्म सिंचाई और भूमि समतलन (लैंड लेवेलिंग) जैसे उपाय बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपनी मिट्टी की जांच कराने और अपनी जमीन की जरूरतों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने फसल विविधीकरण, जैविक पदार्थों और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर भी जोर दिया।
मशीनीकरण और फसल विविधीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे किसान व्यक्तिगत रूप से हर महंगी मशीन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए, किसान समूहों, सहकारी समितियों और किराए पर मशीनरी उपलब्ध कराने वाले केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक मशीन का लाभ कई खेतों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव के युवाओं को कृषि मशीनरी को संचालित करने और उसकी मरम्मत करने तथा कृषि से संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इससे किसानों की लागत कम होगी और गांवों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
सैनी ने फसल विविधीकरण पर अधिक ध्यान देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि जहां भी स्थितियां अनुकूल हों, वहां दालों, तिलहन, सब्जियों, फलों और अन्य उपयुक्त फसलों की खेती की संभावनाओं का पता लगाया जाना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से आग्रह किया कि वे किसानों को गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर प्रशिक्षण देकर सहायता करें और उन्हें बेहतर बाजारों से जोड़ने में मदद करें।
किसान कल्याण और सरकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि को तकनीक के साथ एकीकृत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए पोर्टल पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है। इनमें से 44,000 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले 23,930 किसानों का सत्यापन पूरा हो चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में 20,727 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है और अब तक 1.95 लाख सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि धान के पराली के उचित प्रबंधन और गांठ (बालिंग) बनाने के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन दिया गया है। अब तक 10 लाख किसानों को सब्सिडी के रूप में 907 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।