हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सीएम की बैठकों के फैसलों को लागू करने के लिए तय हुई समय सीमा

हरियाणा के सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली में बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए फैसलों को धरातल पर लागू करवाते समय अधिकारियों की टालने वाली नीति अब बिल्कुल नहीं चलेगी। सरकार ने सभी विभागों को इस संबंध में नई एसओपी जारी कर दी है। अब किसी भी फाइल पर अधिकारी 'आवश्यक कार्यवाही करें', 'शीघ्र कार्यवाही करें' तथा 'देख लें' जैसे अस्पष्ट शब्द लिखकर नोटिंग नहीं दे सकेंगे।
फाइलों पर अब होगी स्पष्ट जानकारी
अब सरकारी फाइलों पर बिल्कुल स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि क्या कार्य करना है। फाइल पर यह भी लिखा जाएगा कि कार्य कौन करेगा, किसके सहयोग से करेगा और कब तक पूरा करेगा। इस कार्य का क्या परिणाम अपेक्षित है, इसकी भी पूरी जानकारी देनी होगी। इन पांच बिंदुओं के आधार पर ही अब सरकार की सभी फाइलें आगे चलेंगी।
तय समय सीमा में लागू होंगे सीएम के फैसले
मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए फैसलों को अब एक निश्चित समय सीमा के भीतर लागू किया जाएगा। इस पूरे मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी पूरी तरह से तय की जाएगी। राज्य सरकार ने बैठकों के संबंध में विस्तृत एसओपी जारी करके सभी विभागों को निर्देश भेज दिए हैं।
कम से कम तीन दिन पहले मिलेगा एजेंडा
मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार, संबंधित विभागों द्वारा कम से कम तीन दिन पहले बैठक में शामिल होने वाले सभी अधिकारियों को एजेंडा उपलब्ध करवाया जाएगा। एजेंडा मिलने के बाद अधिकारी अपनी पूरी रिपोर्ट समय पर तैयार कर सकेंगे। बैठक के दौरान केवल उन्हीं विषयों को रखा जाएगा जिन पर मौके पर ही फैसले लिए जा सकें।
मिनट्स ऑफ मीटिंग के लिए नई गाइडलाइन
बैठक की कार्यवाही यानी 'मिनट्स ऑफ मीटिंग' तैयार करने के लिए भी सरकार की तरफ से नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसमें बिल्कुल स्पष्ट किया गया है कि बैठक के फैसले उन सभी संबंधित अधिकारियों को भेजने अनिवार्य होंगे जिनसे वह योजना जुड़ी हुई है। अभी तक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के फैसले फील्ड के अधिकारियों तक पहुंचने میں लंबा समय लेते थे। कई मामलों में तो यह फैसले केवल मुख्यालय तक ही सीमित होकर रह जाते थे।
तीन दिन के भीतर देनी होगी जानकारी
सरकार द्वारा की गई इस नई कार्रवाई के बाद अब निदेशक से लेकर धरातल पर काम करवाने वाले अधिकारी तक को फैसले की जानकारी मात्र तीन दिन के भीतर दे दी जाएगी। कार्यवाही की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि किन मुद्दों पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। बैठक होने के ठीक तीन दिन के भीतर 'मिनट्स ऑफ मीटिंग' तैयार करना अनिवार्य होगा।
एक्शन टेकन रिपोर्ट में देना होगा ठोस सबूत
सरकार ने इस मामले में और अधिक सख्ती दिखाते हुए निर्देश दिए हैं कि अक्सर अधिकारी बैठकों में केवल 'कार्यवाही की जा रही है' बोलकर अपनी जिम्मेदारी से छूट जाते थे। अब एक्शन टेकन रिपोर्ट में किसी भी हाल में ठोस कार्रवाई का पूरा जिक्र करना बहुत जरूरी होगा। यही नहीं, किसी भी योजना के पूरे होने तथा कार्य चलने के संबंध में पक्के सबूत भी रिपोर्ट के साथ संलग्न करने होंगे।
एक माह के भीतर देनी होगी एटीआर
अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि एमओएम जारी होने के ठीक एक माह के भीतर एटीआर यानी एक्शन टेकन रिपोर्ट देनी होगी। अधिकारियों को यह सारी महत्वपूर्ण जानकारी सीएम मीटिंग मॉनिटरिंग पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। इस रिपोर्ट को सीएमओ के विशेष अधिकारी खुद देखेंगे और सीधा मुख्यमंत्री को इसकी रिपोर्ट सौंपेंगे।
नोडल अधिकारी की होगी पूरी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए सभी फैसलों को सही ढंग से लागू करवाने और उनकी निगरानी करने के लिए हर विभाग एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा। मुख्यमंत्री की बैठकों के संबंध में नियुक्त किया गया यह अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार माना जाएगा।