हरियाणा में 255 ADA पदों के इंटरव्यू से पहले सरकारी वकीलों के पदनाम पर फिर उठे कानूनी सवाल

हरियाणा में 255 ADA पदों के इंटरव्यू से पहले सरकारी वकीलों के पदनाम पर फिर उठे कानूनी सवाल

हरियाणा में 255 ADA पदों के इंटरव्यू से पहले सरकारी वकीलों के पदनाम पर फिर उठे सवाल

10 से 18 अक्टूबर तक होने हैं असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी पदों के लिए साक्षात्कार

1976 के संशोधन के बाद ‘Attorney’ संबंधी वैधानिक प्रावधान हटाए जाने का हवाला देते हुए पदनामों की समीक्षा की मांग

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राजकुमार अग्रवाल/चंडीगढ़ /03 अक्टूबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

हरियाणा में 255 असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA) पदों पर चयन के लिए आगामी 10 से 18 अक्टूबर तक साक्षात्कार होने हैं। इन साक्षात्कारों से ठीक पहले प्रदेश में नियमित सरकारी विधि अधिकारियों के पदनामों में इस्तेमाल किए जा रहे ‘Attorney’ शब्द को लेकर कानूनी सवाल एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट तथा विधि-विधायी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने कहा है कि उन्होंने इसी वर्ष जुलाई में हरियाणा सरकार के गृह विभाग को इस विषय में कानूनी नोटिस भेजा था। उन्होंने इस नोटिस के माध्यम से District Attorney (DA), Deputy District Attorney (DDA) तथा Assistant District Attorney (ADA) जैसे पदनामों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उनके अनुसार इस प्रतिनिधित्व पर अब तक विभाग की ओर से कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

1976 के संशोधन को बनाया गया है मुख्य आधार

हेमंत कुमार के अनुसार संसद ने Advocates Act, 1961 में वर्ष 1976 में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया था। आधिकारिक India Code में भी इस अधिनियम की Section 31, जिसका शीर्षक Special provision for attorneys है, उसे Advocates (Amendment) Act, 1976 की Section 7 द्वारा 1 जनवरी 1977 से omitted यानी हटाया हुआ दिखाया गया है।

उनका तर्क है कि इस विधायी बदलाव के बाद सरकारी विधि अधिकारियों के पदनामों में ‘Attorney’ शब्द के निरंतर इस्तेमाल की कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा की जानी बेहद जरूरी है। हालांकि, इस प्रश्न का अंतिम निर्धारण संबंधित सेवा नियमों, नियुक्ति अधिसूचनाओं और लागू राज्य कानूनों की समग्र व्याख्या पर पूरी तरह निर्भर करेगा।

अदालत में होती है Government Pleader या Public Prosecutor की भूमिका

हेमंत कुमार ने अपने भेजे गए नोटिस में यह मुख्य मुद्दा भी उठाया है कि राज्य सरकार के नियमित विधि अधिकारी विभिन्न मामलों में अदालतों के अंदर Government Pleader, Public Prosecutor अथवा Government Counsel के रूप में कार्य करते हैं।

उन का कहना है कि किसी भी पदनाम और उसकी वास्तविक न्यायालयी भूमिका के बीच पूरी स्पष्टता बनाए रखना हमेशा आवश्यक होता है।

‘Attorney’ पदनाम की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग

उनके अनुसार केवल यह तथ्य कि ‘Attorney’ शब्द किसी पदनाम में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है, उसकी वर्तमान वैधानिक स्थिति को स्वतः स्पष्ट नहीं कर देता है।

इसलिए राज्य सरकार को यह बात बतानी चाहिए कि District Attorney, Deputy District Attorney और Assistant District Attorney पदनाम किस वैधानिक प्रावधान, सेवा नियम या फिर अधिसूचना के आधार पर वर्तमान समय में भी लागू किए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार की विभिन्न वेबसाइटों पर वर्तमान समय में भी Assistant District Attorney और Deputy District Attorney जैसे पदनामों का इस्तेमाल साफ तौर पर दिखाई देता है।

संविधान में Attorney General का है अलग संवैधानिक पद

हेमंत कुमार ने यह भी मुख्य रूप से इंगित किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के Attorney-General for India के संवैधानिक पद का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

यह पद देश के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भारत के सर्वोच्च विधि अधिकारी का होता है। उनका कहना है कि संवैधानिक रूप से Attorney-General का पद पूरी तरह अलग है और राज्य सरकार के नियमित विधि अधिकारियों के पदनामों की वैधानिक स्थिति का परीक्षण अलग से किया जाना चाहिए।

हरियाणा सरकार से सेवा नियमों की समीक्षा करने की मांग

हेमंत कुमार ने राज्य सरकार से यह प्रमुख मांग की है कि वह नियमित सरकारी वकीलों से संबंधित सेवा नियमों, नियुक्ति अधिसूचनाओं और प्रचलित पदनामों की विधिक समीक्षा करवाए।

उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ‘Attorney’ शब्द के स्थान पर Government Advocate, Government Pleader, Public Prosecutor अथवा Law Officer जैसे पदनामों पर विचार किया जाना चाहिए। इससे राज्य की सेवा नियमावली को मौजूदा केंद्रीय कानून, न्यायालयीन कार्यप्रणाली और सरकारी विधि अधिकारियों की वास्तविक भूमिका के साथ अधिक स्पष्ट रूप से समन्वित किया जा सकेगा।

यह पूरा मामला इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है क्योंकि HPSC द्वारा 255 ADA पदों की चयन प्रक्रिया इस समय अपने बेहद महत्वपूर्ण इंटरव्यू चरण में प्रवेश कर रही है। ऐसे समय में संबंधित पदनामों की वैधानिक स्थिति पर सरकार की ओर से कोई भी स्पष्टता सामने आना प्रशासनिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

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