हेयरलाइन गई तो शादी की लाइन भी गई, युवाओं में घटते बालों और शादी की चिंता

हेयरलाइन गई तो शादी की लाइन भी गई!
आजकल शादी की उम्र भले ही 22-23 साल हो गई हो, लेकिन लड़के की शादी की चिंता उससे कहीं पहले शुरू हो जाती है,जब वह पहली बार अपनी फोटो देखकर यह महसूस करता है कि सिर के ऊपर बाल कम और माथा ज्यादा दिखाई दे रहा है। पहले लड़का आईने में चेहरा देखता था कि नाक ठीक है या कान ज्यादा बाहर तो नहीं निकले। अब सबसे पहले माथा देखता है कि कहीं वह पीछे तो नहीं भाग रहा! जमाना बदल गया है। आजकल शादी के लिए बायोडाटा में लंबाई, पढ़ाई, नौकरी, पैकेज और खानदान के साथ एक अदृश्य कॉलम भी जुड़ गया है,हेयरलाइन की स्थिति।
यूट्यूब, इंस्टाग्राम और सेल्फी कैमरे ने युवाओं को इतना जागरूक कर दिया है कि 22 साल का लड़का शादी की फोटो में अपनी हेयरलाइन देखकर ऐसा चिंतित हो जाता है, जैसे सरकार ने उसकी उम्र बढ़ाकर 42 कर दी हो। एक तरफ कैमरा चेहरा चमका रहा है, दूसरी तरफ बालों की घटती संख्या असली उम्र का राज खोल रही है। बेचारा लड़का फोटो खिंचवाते समय मुस्कुराए भी तो कैसे? उसे डर रहता है कि कैमरा कहीं उसकी मुस्कान से ज्यादा उसकी हेयरलाइन को हाईलाइट न कर दे।
पहले बाल झड़ना उम्र बढ़ने की निशानी माना जाता था। आदमी 30-40 की उम्र में टकला होता था तो लोग कहते थे,“भाई साहब, अनुभव बहुत है।” अब 22 साल में बाल पीछे हुए नहीं कि अनुभव नहीं, चिंता शुरू। युवक गूगल पर खोज रहा है,“बाल कैसे बचाएं?” फिर यूट्यूब पर वीडियो देखता है,“सात दिन में हेयरलाइन वापस लाएं।” इसके बाद तेल, शैंपू, सीरम, घरेलू नुस्खे और जाने कितनी बोतलें घर में आ जाती हैं। बाल बचें न बचें, बाथरूम की शेल्फ जरूर समृद्ध हो जाती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि पुरुषों में बाल झड़ने का बड़ा कारण जेनेटिक्स है। यानी पिता के सिर से बाल गए तो बेटा बचपन से ही अपने सिर को विरासत समझकर चल रहा है। ऊपर से तनाव, नींद की कमी, खराब खान-पान और प्रदूषण ने बालों को ऐसा वातावरण दे दिया है कि वे भी सोचते होंगे,“यहां ज्यादा दिन टिकना ठीक नहीं।” नतीजा यह कि करोड़ों लोग बाल झड़ने से परेशान हैं, मगर डॉक्टर तक पहुंचने वालों की संख्या बहुत कम है। बाकी लोग घर में बैठे प्याज का रस, एलोवेरा, तेल और इंटरनेट की सलाह से अपनी खोपड़ी को प्रयोगशाला बनाए हुए हैं।
मामला केवल बालों का नहीं है। मामला शादी का है, और शादी के बाजार में सुंदरता का मूल्यांकन अब बहुत बारीकी से होने लगा है। युवती के लंबे, घने, चमकदार बाल सुंदरता का प्रतीक माने जाते हैं और युवक के मामले में वही बाल विवाह योग्य होने की संभावनाओं का सहारा बन गए हैं। लड़की के बाल कमर तक हों तो कविता बन जाती है और लड़के के बाल माथे से दो इंच पीछे चले जाएं तो रिश्तेदारों की बैठक शुरू हो जाती है,“देखो, लड़का बाकी तो ठीक है, लेकिन बाल थोड़े कम हैं।”
अर्थात लड़के की नौकरी करोड़ों की हो सकती है, व्यक्तित्व शानदार हो सकता है, स्वभाव संस्कारी हो सकता है, परिवार अच्छा हो सकता है, लेकिन सिर पर मैदान थोड़ा ज्यादा खुला हुआ है तो सारी खूबियां अचानक डिस्काउंट में चली जाती हैं। विवाह-योग्यता का समीकरण बड़ा विचित्र है,कम बाल, कम अंक; ज्यादा बाल, ज्यादा संभावना।
अब बाजार ने भी युवाओं की इस चिंता को समझ लिया है। विग और हेयर सिस्टम ऐसे आने लगे हैं कि सामने वाला भी भ्रमित हो जाए कि भाई के सिर पर बाल हैं या तकनीक की उपलब्धि। बाल ऐसे लगाए जाते हैं कि देखने वाला कहे,“वाह, क्या हेयर स्टाइल है!” और बेचारा पहनने वाला मन ही मन कहे“भगवान करे हवा आज तेज न चले।”
दूसरी ओर हेयर ट्रांसप्लांट ने उम्मीद जगा दी है। जहां प्रकृति ने कहा,“अब बस,” वहां विज्ञान कह रहा है,“रुकिए, अभी संभावना बाकी है।” सिर पर फिर से खेती शुरू की जा सकती है। फर्क सिर्फ इतना है कि खेत अपना है, बीज अपना है और खर्च भी अपना। आदमी अपने बालों को बचाने में उतना पैसा लगा देता है, जितने में कभी उसके पिता ने पूरी शादी कर दी होगी।
लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं होती। बाल आ भी जाएं तो अब नई चिंता,हेयर स्टाइल कौन-सी रखें? क्योंकि आज का युवा केवल बाल नहीं रखता, हेयर स्टेटमेंट रखता है। यूट्यूब पर देखकर कटिंग करवाता है, इंस्टाग्राम पर देखकर स्टाइल बदलता है और सेल्फी में देखकर रोज निरीक्षण करता है। कभी बाल ऊपर, कभी नीचे, कभी आगे, कभी साइड में। उद्देश्य एक ही,हेयरलाइन ऐसी दिखाई दे कि उम्र 22 की लगे, 42 की नहीं।
मगर इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा व्यंग्य यही है कि हमने सुंदरता को इतना कैमरा-निर्भर बना दिया है कि अब आदमी अपना चेहरा कम और उसकी स्क्रीन पर बनी तस्वीर ज्यादा जी रहा है। प्राकृतिक बालों की अपनी खूबसूरती है, लेकिन आज प्राकृतिक दिखना भी एक महंगी कला बनता जा रहा है। नकली बाल इतने असली और असली बाल इतने चिंताजनक हो गए हैं कि विवाह के समय लड़की वाले शायद कुंडली से पहले पूछ बैठें,“बाल प्राकृतिक हैं या पैकेज के साथ आए हैं?”
सच तो यह है कि 22-23 की उम्र में बाल झड़ना यह साबित नहीं करता कि आदमी जल्द ही गंजा हो जाएगा। लेकिन अगर बाल लगातार तेजी से झड़ रहे हों तो कारण जानना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह लेना समझदारी है, न कि इंटरनेट के हर नुस्खे को सिर पर आजमाना।
आखिर शादी जीवनसाथी चुनने का रिश्ता है, हेयरलाइन चुनने का नहीं। वरना आने वाले समय में विवाह विज्ञापन कुछ ऐसे होंगे,“सुंदर, शिक्षित, नौकरीपेशा युवक, अपना मकान, चार पहिया वाहन, स्वभाव अच्छा, परिवार प्रतिष्ठित, हेयरलाइन वर्तमान में सुरक्षित।” और यदि बाल थोड़े कम हुए तो नीचे छोटा-सा नोट होगा,“हेयर ट्रांसप्लांट के लिए तैयार।”
अब बेचारा युवक नौकरी, कारोबार और भविष्य की चिंता करे या रोज आईने में खड़े होकर माथे की सीमा रेखा की निगरानी करे? लगता है आने वाले समय में देश की सीमाओं के साथ-साथ युवाओं की हेयरलाइन की भी सुरक्षा नीति बनानी पड़ेगी। क्योंकि सीमा पीछे खिसके तो देश चिंतित होता है और हेयरलाइन पीछे खिसके तो आजकल रिश्ता!
और अंत में एक चुटकुला दो जूएं आपस में बात कर रही थी ,:बहन इस खोपड़ी पर कभी सिर्फ एक पगडंडी हुआ करती थी आज पूरा खुला मैदान है!"-
मधु सुभाष बुड़ावन वाला,रतलाम.मप्र