गुरुग्राम में आयोजित हुआ व्यस्त जीवन शांत मन विशेष व्याख्यान प्रोफेसर ओंकार चंद ने दी मानसिक शांति की सीख

व्यस्त दिनचर्या में भी मन को शांत रखना संभव, आत्म-संवाद और राजयोग ही सच्ची शक्ति: प्रो. ओंकार चंद
मेफील्ड गार्डन (सेक्टर-51, गुरुग्राम) में ‘व्यस्त जीवन, शांत मन’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित; पूर्व सहायक आयुक्त प्रवीण चंद्र वशिष्ठ, सामाजिक कार्यकर्ता अलका दलाल और डीआरडीओ के अपर निदेशक कैप्टन शिव सिंह रहे मुख्य अतिथि
फतह सिंह उजाला /गुरुग्राम /20 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
गुरुग्राम के मेफील्ड गार्डन सेक्टर-51 स्थित राजयोग ध्यान केंद्र में व्यस्त जीवन शांत मन विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस प्रेरणादायक सत्र में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनावमुक्त रहकर आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना था।
प्रशांत मन और आत्म संवाद पर विशेष जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माउंट आबू राजस्थान से पधारे अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता और पत्रिका के संपादक राजयोगी प्रोफेसर ओंकार चंद जी रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुमारी दिव्या द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुई। केंद्र प्रभारी बीके अंजलि बहन ने मुख्य वक्ता और मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व सहायक आयुक्त प्रवीण चंद्र वशिष्ठ, सामाजिक कार्यकर्ता अलका दलाल और डीआरडीओ के अपर निदेशक कैप्टन शिव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विचारों की अव्यवस्था है तनाव का मुख्य कारण
प्रोफेसर ओंकार चंद जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन में व्यस्तता कोई समस्या नहीं है। विचारों की अव्यवस्था और व्यर्थ चिंतन ही तनाव का मुख्य कारण बनते हैं। मन की शांति बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती है। यह हमारे आंतरिक विचारों और दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजयोग ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति कठिन दिनचर्या में भी अपने अंतर्मन को शांत रख सकता है।
सामूहिक राजयोग ध्यान और प्रसाद वितरण
कार्यक्रम के दौरान कुमारी दामिनी ने एक ऊर्जावान प्रेरक गीत और विचार-प्रबंधन पर आधारित गतिविधि कराई। इस गतिविधि में सभी साधकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मन की चिंताओं को त्यागने का संकल्प दोहराया। अतिथियों ने समाज के लिए ऐसे आध्यात्मिक सत्रों को आवश्यक बताया। सत्र के समापन पर सामूहिक राजयोग ध्यान का अभ्यास किया गया और अंत में सभी को ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया।