गुरुग्राम में भव्य रूप से संपन्न हुआ भगवान विश्वकर्मा पूजन और मां भुवneśvarī महायज्ञ

गुरुग्राम में भव्य रूप से संपन्न हुआ भगवान विश्वकर्मा पूजन और मां भुवneśvarī महायज्ञ

सृजन की शक्ति मानव जीवन को आगे बढ़ाने वाली शक्ति - जगद्गुरु नरेंद्रानंद सरस्वती

भारतीय संस्कृति ने सदैव श्रम, कौशल तथा सृजन को सम्मान प्रदान किया

विश्व के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा का भव्य पूजन-अर्चन विधि-विधान से संपन्न

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शिल्प की समस्त विद्याओं के अधिष्ठाता के रूप में भगवान विश्वकर्मा की आराधना

मां भुवनेश्वरी की जगत की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में आराधना की जाती

फतह  सिंह उजाला/गुरुग्राम  /18 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

गुरुग्राम के पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में विश्व के शिल्पी देवता भगवान विश्वकर्मा महाराज का भव्य पूजन-अर्चन वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन के दौरान महाविद्या मां भुवनेश्वरी देवी का दिव्य अनुष्ठान एवं महायज्ञ भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। यह संपूर्ण आयोजन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

भगवान विश्वकर्मा और भारतीय संस्कृति

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा का विशेष स्थान है। निर्माण, सृजन, वास्तु एवं शिल्प की समस्त विद्याओं के अधिष्ठाता के रूप में भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाती है। सृजन की शक्ति मानव जीवन को आगे बढ़ाने वाली शक्ति है और भारतीय संस्कृति ने सदैव श्रम, कौशल तथा सृजन को सम्मान प्रदान किया है।

मां भुवनेश्वरी देवी का विशेष अनुष्ठान

महायज्ञ के अंतर्गत महाविद्या मां भुवनेश्वरी देवी का विशेष अनुष्ठान भी संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रों एवं देवी सूक्तों के उच्चारण के बीच मां भुवनेश्वरी का पूजन, अर्चन एवं हवन किया गया। साधकों एवं श्रद्धालुओं ने देवी के समक्ष लोककल्याण, सुख-शांति, समृद्धि तथा राष्ट्र के मंगल की कामना की। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने मां भुवनेश्वरी की महिमा बताते हुए कहा कि सनातन परंपरा में महाविद्याओं का साधना एवं उपासना में विशिष्ट महत्व है और मां भुवनेश्वरी की जगत की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में आराधना की जाती है।

आध्यात्मिक वातावरण और पूजन

विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर वैदिक विद्वानों एवं आचार्यों द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन, मंत्रोच्चार एवं हवन किया गया। भगवान विश्वकर्मा को विश्व के प्रथम शिल्पकार एवं निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में स्मरण करते हुए उनके समक्ष सुख-समृद्धि, उन्नति, कौशल एवं सर्वांगीण कल्याण की कामना की गई। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति अर्पित कर भगवान विश्वकर्मा से परिवार, समाज एवं राष्ट्र के मंगल की प्रार्थना की। आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की सुगंध और धार्मिक अनुष्ठानों से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। अंत में आरती एवं मंगलकामना के साथ पूजन-अनुष्ठान का समापन हुआ जिसमें डॉ विनय मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी, देव नारायण शुक्ल आदि उपस्थित रहे।

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