गुुरुग्राम में डिफॉल्टर बिल्डरों पर बड़ी कार्रवाई, 71 बिल्डरों के बैंक खाते फ्रीज और 446 करोड़ की बकाया राशि होगी वसूल

गुुरुग्राम में डिफॉल्टर बिल्डरों पर बड़ी कार्रवाई, 71 बिल्डरों के बैंक खाते फ्रीज और 446 करोड़ की बकाया राशि होगी वसूल

डिफॉल्टर बिल्डरों पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 71 बिल्डरों के बैंक खाते फ्रीज

446 करोड़ रुपये की हरेरा बकाया राशि की वसूली के लिए सख्त कदम

कई मामलों में चार वर्ष से अधिक समय से राशि की वसूली नहीं हो पाई

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संपत्तियों की कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी

फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम/30 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

जिला प्रशासन गुरुग्राम ने घर खरीदारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक बहुत बड़ी कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई उन 71 बिल्डरों और प्रमोटरों के खिलाफ की जा रही है जिन्होंने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी हरेरा, गुरुग्राम द्वारा निर्धारित जुर्माने और रिफंड राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया है। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • 71 डिफॉल्टर बिल्डरों के बैंक खाते तत्काल प्रभाव से फ्रीज किए गए हैं।
  • कुल 446 करोड़ रुपये की हरेरा बकाया राशि की वसूली के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
  • कई मामलों में चार वर्ष से अधिक समय से राशि की वसूली नहीं हो पाई है।
  • बिल्डरों की संपत्तियों की कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी।

हरेरा बकाएदारों के खिलाफ सख्त कदम

जिला प्रशासन गुरुग्राम ने खरीदारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रशासन ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी हरेरा, गुरुग्राम द्वारा निर्धारित जुर्माने एवं रिफंड राशि का भुगतान नहीं करने वाले 71 बिल्डरों एवं प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ कुल 446 करोड़ रुपये के रिकवरी सर्टिफिकेट लंबित पड़े हैं। इनमें से कई मामले ऐसे हैं जिनमें चार वर्ष से अधिक समय से राशि की वसूली बिल्कुल भी नहीं हो पाई है।

बैंक खाते फ्रीज और संपत्ति कुर्की के आदेश

रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 40(1) के तहत प्राधिकरण द्वारा निर्धारित राशि को भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जा सकता है। इसी प्रावधान के तहत जिला प्रशासन ने सभी 71 डिफॉल्टर बिल्डरों के बैंक खाते तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट, जैसा कि हरियाणा में राज्यभर में लागू है, के प्रावधानों के तहत उनकी चल एवं अचल संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यदि फ्रीज किए गए बैंक खातों अथवा कुर्क की गई संपत्तियों से बकाया राशि की पूरी वसूली नहीं हो पाती है, तो भू-राजस्व कानून के तहत उपलब्ध अन्य कठोर कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। इस कठोर कार्रवाई में डिफॉल्टर की गिरफ्तारी एवं हिरासत की कार्रवाई भी पूरी तरह शामिल है। सभी संबंधित बिल्डरों को बकाया राशि तत्काल प्रभाव से जमा कराने के लिए आधिकारिक नोटिस भी जारी किए गए हैं।

प्रमुख डिफॉल्टर बिल्डरों पर बकाया राशि का विवरण

प्रमुख डिफॉल्टर बिल्डरों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं जिन पर बहुत अधिक राशि बकाया है। अंसल हाउसिंग और अंसल कंस्ट्रक्शन हाउसिंग पर कुल 91 करोड़ रुपये की बकाया राशि लंबित है। रहेजा पर 90 करोड़ रुपये, वाटिका पर 80 करोड़ रुपये, पार्श्वनाथ पर 74 करोड़ रुपये और रामप्रस्थ पर 57 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, आईआरईओ पर 24 करोड़ रुपये तथा आईएलडी मिलेनियम पर 8.59 करोड़ रुपये की बकाया राशि लंबित है। डीसी उत्तम सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि प्राधिकरण द्वारा बिल्डर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना अपनी जगह एक अलग प्रक्रिया है। लेकिन जब तक वसूली की गई यह राशि वास्तविक लाभार्थी यानी घर खरीदार तक नहीं पहुंचती है, तब तक इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पूरा नहीं होता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिला प्रशासन यह पूरी तरह सुनिश्चित करेगा कि कानूनन घर खरीदारों को मिलने वाली राशि की वसूली बहुत प्रभावी ढंग से हो सके।

वसूली की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा

डीसी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में हरेरा की बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया पूर्व में अपेक्षित गति से आगे बिल्कुल नहीं बढ़ पाई थी। वर्तमान में की जा रही यह कार्रवाई लंबित सभी रिकवरी सर्टिफिकेट की एक व्यापक समीक्षा करने के बाद ही शुरू की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अब इस वसूली की प्रगति की साप्ताहिक स्तर पर डीसी कार्यालय द्वारा नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी। संबंधित सभी एसडीएम और तहसीलदारों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे रिकवरी प्रक्रिया को एक तय समयबद्ध तरीके से पूरा करें। जिन घर खरीदारों के पक्ष में हरेरा द्वारा रिकवरी सर्टिफिकेट पहले ही जारी किए जा चुके हैं, वे अपनी रिकवरी की मौजूदा स्थिति जानने के लिए जिला राजस्व अधिकारी यानी डीआरओ कार्यालय जा सकते हैं। वे इसके अलावा अपने संबंधित एसडीएम कार्यालय या तहसीलदार कार्यालय से भी संपर्क करके पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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