गुरुग्राम में मेडिकल कालेजों की बदहाली, चार साल से नहीं हुई नियमित फैकल्टी भर्ती

गुरुग्राम में मेडिकल कालेजों की बदहाली, चार साल से नहीं हुई नियमित फैकल्टी भर्ती

डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा गया है। गुरुग्राम से यह खबर सामने आई है कि हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी चल रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया यानी डीएमए ने सरकार को कड़ा संदेश दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और एनएमसी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सरकार से तुरंत नियमित भर्ती शुरू करने की मांग की गई है। यह महत्वपूर्ण ज्ञापन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार और महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियांशु शर्मा की तरफ से भेजा गया है।

चार साल से नहीं हुई नियमित फैकल्टी भर्ती

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ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि डीएमईआर और यूएचएस रोहतक में पिछले चार साल से कोई नियमित फैकल्टी भर्ती नहीं हुई है। वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया अक्टूबर 2023 में पूरी हो पाई थी। इस लंबी देरी के कारण कई एमडी और एमएस विशेषज्ञ डॉक्टर निजी क्षेत्र तथा दूसरे राज्यों में चले गए। हाल ही में सरकार की तरफ से 750 अनुबंध पदों पर भर्ती निकाली गई थी। लेकिन कम वेतन मिलने और सेवा सुरक्षा न होने के कारण केवल 70 से 80 पद ही भरने की उम्मीद है। डॉ. अमित व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि पीजीआईएमएस रोहतक, केसीजीएमसी करनाल, बीपीएस खानपुर और मेवात मेडिकल कॉलेज में 30 से 40 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।

विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों की स्थिति

एसएबीवी मेडिकल कॉलेज छायसा फरीदाबाद में तो 70 प्रतिशत पद खाली हैं। भिवानी, कोरियावास नारनौल और कुटेल करनाल में स्थायी फैकल्टी की स्थिति लगभग शून्य है। डीएमए के अनुसार इस गंभीर फैकल्टी संकट की वजह से एमबीबीएस और पीजी छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। छात्रों की थीसिस, रिसर्च और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। अस्पताल में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं और जटिल मरीजों का इलाज भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है।

चिकित्सा शिक्षा और एनएमसी मानकों पर संकट

वर्तमान स्थिति के कारण नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी के मानकों को पूरा करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। इससे आने वाले समय में एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ने की बजाय घटने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। डीएमए की ओर से प्रमुख मांग की गई है कि सभी स्वीकृत पदों पर समयबद्ध तरीके से नियमित भर्ती की जाए। इसके अलावा समान कार्य के लिए समान वेतन का नियम सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। जब तक नियमित भर्ती पूरी नहीं होती, तब तक संविदा फैकल्टी को पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, ईएल, मेडिकल लीव, मातृत्व और पितृत्व अवकाश तथा अकादमिक लीव सहित सभी लाभ मिलने चाहिए।

सरकार से पारदर्शी नीति और त्वरित कार्रवाई की मांग

संगठन ने एक पारदर्शी पदोन्नति नीति बनाने और अकादमिक तथा प्रशासनिक कार्यों में समान अवसर दिए जाने की मांग की है। डॉ. अमित व्यास ने कहा कि एक मजबूत फैकल्टी ही मजबूत मेडिकल कॉलेज और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की असली नींव होती है। यदि सरकार ने जल्द ही नई भर्तियों और सेवा सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं किया, तो हरियाणा की पूरी मेडिकल शिक्षा गंभीर संकट में चली जाएगी। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि अब इस मामले में और अधिक देरी करना स्वास्थ्य तंत्र के हित में बिल्कुल भी नहीं होगा।

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