गुरुग्राम में जैन समाज ने श्रद्धा एवं संयम के साथ मनाया पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व, वार्षिक रथ यात्रा निकाली गई

गुरुग्राम के जैकबपुरा स्थित श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व को बहुत ही श्रद्धा, संयम और साधना के साथ मनाया गया। इस महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं ने त्याग और तपस्या का मार्ग अपनाया।
- दशलक्षण महापर्व का समापन क्षमावाणी महापर्व के रूप में हुआ।
- सभी जैन बंधुओं ने एक-दूसरे से मिच्छामि दुक्कड़म्-उत्तम क्षमा कहकर अपनी भूलों के लिए क्षमा याचना की।
- हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य कुलदीप जैन ने कार्यक्रम में शिरकत कर भगवान का आशीर्वाद लिया।
દशलक्षण महापर्व का महत्व और गतिविधियाँ
मंदिर प्रबंधन कमेटी ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दस दिन आत्मशुद्धि के दस धर्मों के प्रतीक हैं। इनमें उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य शामिल हैं।
इन दस दिनों के दौरान श्रद्धालु व्रत, उपवास, स्वाध्याय और प्रवचनों के माध्यम से अपने जीवन को संयमित करने का प्रयास करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन सुबह अभिषेक, शांतिधारा और भक्ति की गई। इसके बाद विद्वानों द्वारा दशलक्षण धर्म पर विशेष प्रवचन दिए गए।
शाम के समय में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या और तत्व चर्चा का आयोजन किया गया गया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन
सोमवार को मंदिर जी से श्री नशिया जी तक एक वार्षिक रथ यात्रा निकाली गई। इस रथ यात्रा में भगवान पाश्र्ववनाथ की प्रतिमा को रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया।
श्री दिगंबर जैन समाज गुरुग्राम श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैकबपुरा के प्रधान नरेश कुमार जैन (धनकोट), उप-प्रधान शैलेंद्र जैन, महामंत्री अशोक कुमार जैन (मियांवाली कॉलोनी), सह- uma-मंत्री जिनेंद्र जैन (बर्तन वाले) और कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन ने इस आयोजन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी जैकबपुरा से नशिया जी जाने वाले पात्रों में ख्वासी अभय जैन और ऋषभ जैन (एडवोकेट) शामिल रहे।
क्षमा याचना का सिद्धांत
जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट ने बताया कि जैन समाज के सिद्धांतों में धर्म की स्थापना के साथ-साथ क्षमा याचना का बहुत बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के साथ कमाया हुआ पैसा नहीं बल्कि धर्म ही साथ जाता है। इसलिए क्षमा करना भी एक बहुत बड़ा धर्म माना जाता है।
रथ यात्रा में शामिल सदस्य और सारथी
रथ यात्रा के दौरान सारथी प्रदीप जैन (पुत्र स्व. पुष्पचंद जैन पूर्व प्रधान), धन कुबेर राकेश जैन (पुत्र स्व. हरिकिशन जैन नारनौल वाले) और इन्द्र प्रथम पारस जैन (पुत्र किशन चंद जैन जलेबी वाले) व इन्द्र द्वितीय मोहित जैन (पुत्र स्व. जय कुमार जैन फर्रुखनगर वाले) शामिल रहे।
नशिया जी से वापसी में श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी आने वाले पात्रों में ख्वासी ऋषभ जैन (पुत्र स्व. सुरेश चंद जैन टाइप वाले), सारथी अतिन जैन (आदर्श नगर), धन कुबेर आरव जैन (पुत्र पंकज जैन सिद्धार्थ फर्नीचर), इन्द्र प्रथम संदीप जैन (बंद वाले) और इन्द्र द्वितीय शैलेंद्र जैन (उप-प्रधान) शामिल रहे।