गुरुग्राम और नूहं में प्राइवेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन प्रस्ताव पर आई मुश्किलें, 4700 करोड़ रुपये का है मामला

गुरुग्राम और नूहं में प्राइवेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन प्रस्ताव पर आई मुश्किलें, 4700 करोड़ रुपये का है मामला

गुरुग्राम और नूहं में एक नया पैरलल इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क स्थापित करने और चलाने के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) के पास आवेदन जमा किया है। यह कंपनी चाहती है कि उसे इसके लिए पच्चीस साल का लाइसेंस मिले। यह पूरा प्रस्तावित इनिशिएटिवसैंतालीस सौ करोड़ रुपये का है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि द्वारका एक्सप्रेसवे और डीएलएफ सिटी के पास रहने वाले स्थानीय निवासी लंबे समय से बिजली कटौती की लगातार शिकायतों से परेशान हैं।

आवेदन और समीक्षा की प्रक्रिया

यह एप्लीकेशन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 के सेक्शन चौदह और पंद्रह के तहत फाइल की गई है। इस समय हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) इस आवेदन की पूरी समीक्षा कर रहा है। आयोग ने इसके प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए एक स्वतंत्र एक्सपर्ट कमेटी भी नियुक्त कर दी है।

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सरकारी बिजली कंपनियों का विरोध

इस नए प्रस्ताव को लेकर राज्य के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों यानी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN), और हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPN) की तरफ से काफी ज्यादा विरोध सामने आया है। अधिकारियों का तर्क यह है कि यदि किसी प्राइवेट एंटिटी को मार्केट में आने की अनुमति दी जाएगी, तो इससे वे लोग केवल मुनाफे वाले कमर्शियल कंज्यूमर्स को चुनेंगे। इससे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की फाइनेंशियल हेल्थ अस्थिर हो सकती है, क्योंकि यह निगम अपने कुल रेवेन्यू का बयालीस प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से प्राप्त करता है।

क्रॉस-सब्सिडी फ्रेमवर्क पर संकट

इसके अलावा, क्रिटिक्स ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि ये रेवेन्यू स्ट्रीम्स खत्म हो गए, तो इससे क्रॉस-सब्सिडी फ्रेमवर्क को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचेगा। इस स्थिति से ग्रामीण इलाकों के परिवारों और किसानों के लिए बिजली की दरें खतरे में पड़ सकती हैं।

राजनीतिक विरोध और अन्य चिंताएं

इस मामले में राजनीतिक विरोध भी अब सामने आ चुका है। कांग्रेस लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और आईएनएलडी के नेशनल पैट्रॉन संपत सिंह ने इस प्राइवेटाइजेशन प्लान की खुलेआम आलोचना की है। लोगों ने यह चिंता भी जताई है कि इससे यूटिलिटी कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं। इसके अलावा, स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए पहले ही स्मार्ट सिटी स्कीम के तहत सोलह सौ आठ करोड़ रुपये और रिवैम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत पैंतीस सौ चौरासी करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, ऐसे में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पूरी तरह से रिडंडेंट यानी अनावश्यक है।

निवासियों की समस्याएं और आयोग का रुख

डीएलएफ कुतुब एन्क्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बलजीत राठी ने इस बात पर जोर दिया है कि लगातार हो रही बिजली कटौती स्थानीय निवासियों के लिए एक बेहद गंभीर मुद्दा बनी हुई है। दूसरी तरफ, हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) आवेदक की फाइनेंशियल रेडीनेस और इस कदम के ब्रॉडर पब्लिक इंटरेस्ट इंपैक्ट को लेकर अपनी शंका लगातार व्यक्त कर रहा है।

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