नरवाना में श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ तीन दिवसीय गणपति उत्सव

नरवाना में श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ तीन दिवसीय गणपति उत्सव

श्री श्याम बाल वाटिका प्ले स्कूल में तीन दिवसीय गणपति उत्सव का समापन श्रद्धा, उल्लास एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हुआ। उत्सव के शुभारंभ अवसर पर अनेजा मेडिकल हॉल के संचालक एवं क्षेत्र के सम्मानित समाजसेवी श्री जी.डी. अनेजा एवं उनकी धर्मपत्नी ने मुख्य अतिथि के रूप में भगवान गणेश जी की विधिवत स्थापना करवाई। स्थापना के पश्चात तीनों दिनों तक विद्यालय में प्रातः एवं सायंकाल गणपति जी की आरती की गई, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं स्टाफ ने पूरे भक्तिभाव से सहभागिता की।

धार्मिक परंपराओं के साथ संस्कारों का विकास

गणपति उत्सव के माध्यम से विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को केवल धार्मिक परंपराओं से परिचित करवाना ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, श्रद्धा, अनुशासन, एकता, सेवा एवं प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी रहा। विद्यालय में इस प्रकार के पर्व बच्चों को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ बड़ों का सम्मान, मिल-जुलकर रहना और अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

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भक्तिमय माहौल में निकाली गई विसर्जन यात्रा

विसर्जन के अवसर पर श्री श्याम बाल वाटिका प्ले स्कूल से गणपति जी की यात्रा प्रारंभ हुई। ढोल की धुन, भक्तिमय गीतों एवं गणपति बप्पा के जयकारों के बीच बच्चे एवं स्टाफ पैदल यात्रा करते हुए हिसार रोड स्थित श्री श्याम बाल वाटिका पब्लिक स्कूल पहुंचे। यहां आलोक श्रीवास्तव, रिया, पूजा सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक गणपति जी का स्वागत किया। इसके पश्चात यात्रा पतराम नगर स्थित एम.जे. स्कूल पहुंची, जहां रितु, सुनीता, उर्वशी सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य स्वागत के लिए उपस्थित रहे। इसके बाद श्री जी.डी. अनेजा एवं उनकी धर्मपत्नी की उपस्थिति में विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक गणपति जी का विसर्जन किया गया।

इस भक्तिमय यात्रा में प्ले स्कूल की ओर से शेफाली अरोड़ा, अनु, मीनू, शालू, गीता, दीपिका, किरण एवं अन्य स्टाफ सदस्य शामिल हुए। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गणपति बप्पा के जयकारे लगाए और वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

उत्सव की विशेष पहल पर्यावरण संरक्षण रही। विद्यालय द्वारा मिट्टी से निर्मित गणपति जी की प्रतिमा स्थापित की गई। साथ ही बच्चों को स्वयं मिट्टी से गणपति जी की प्रतिमा बनाना सिखाया गया, ताकि वे अपने घरों में भी पर्यावरण के अनुकूल गणपति उत्सव मना सकें। विद्यालय का यह प्रयास बच्चों में यह समझ विकसित करने की दिशा में रहा कि हमारी धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यालय में समय-समय पर विभिन्न भारतीय पर्वों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिससे बच्चे पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यवहारिक रूप से भी भारतीय संस्कारों को समझ सकें।

गणपति विसर्जन के अवसर पर विद्यालय परिवार ने भगवान गणेश से सभी के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष के साथ तीन दिवसीय गणपति उत्सव का भक्तिमय समापन हुआ।

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